23-24 मई को चित्तौरा झील पर मनाया जाएगा महाराजा सुहेलदेव विजय उत्सव
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23 व 24 मई 2026 को बहराइच के चित्तौरा झील स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक परिसर में भव्य विजय उत्सव का आयोजन होगा. कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, चित्र प्रदर्शनी, सरस एवं शिल्प मेले के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच दिया जाएगा. इच्छुक लोग जिला पर्यटन कार्यालय या विकास भवन स्थित डीसी मनरेगा कार्यालय में आवेदन कर अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन कर सकते हैं.
बहराइच. महाराजा सुहेलदेव के विजय उत्सव के अवसर पर विकास खण्ड चित्तौरा अन्तर्गत चित्तौरा झील के तट पर स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक परिसर में 23 व 24 मई 2026 को भव्य उत्सव मनाया जाएगा. विजयोत्सव के अवसर पर सुहेलदेव जी की गौरवगाथा पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उनके जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा. जिसमे जिले के लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सीधा मौका मिल रहा है बस आपको यह काम करना होगा. जानकारी के अनुसार, महाराजा सुहेलदेव 11वीं शताब्दी में श्रावस्ती उत्तर प्रदेश के एक राजा थे,जिन्हें 1034 ई. में बहराइच के ऐतिहासिक युद्ध में महमूद गजनवी के सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी को हराने और मारने के लिए जाना जाता है, इसके साथ ही उन्हें विदेशी आक्रमणकारियों से सनातन संस्कृति और भारत की रक्षा करने वाले नायक के रूप में पूजा जाता है, महाराजा सुहेलदेव के “विजय उत्सव या विजय दिवस” को मनाने के प्रमुख कारण 10 जून 1034 ई.जिसको बहराइच के युद्ध में महाराजा सुहेलदेव ने अपनी सेना के साथ मिलकर सैयद सालार मसूद गाजी की विशाल आक्रमणकारी सेना को पूरी तरह से परास्त कर दिया था,जिनकी याद में बहराइच जिले में चित्तौरा झील के किनारे महाराजा सुहेलदेव की 40 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कराया गया है.
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