90 दिन में तैयार, खेत से बाजार तक कमाई ही कमाई! मुनाफे की चाबी है धान की ये किस्म

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90 दिन में तैयार, खेत से बाजार तक कमाई ही कमाई! मुनाफे की चाबी है धान की ये किस्म


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90 दिन में तैयार, खेत से बाजार तक कमाई! मुनाफे की चाबी है धान की ये किस्म

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Profitable Paddy Farming: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में कम समय, कम लागत और कम पानी में रिकॉर्ड पैदावार देने वाली पीआर 126 धान की किस्म किसानों के लिए बंपर कमाई का जरिया बन चुकी है. जिले के कुल धान क्षेत्र के एक बहुत बड़े हिस्से यानी करीब 90 हजार हेक्टेयर में अकेले इसी किस्म की खेती की जा रही है. जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा के मुताबिक, यह धान मात्र 90 से 93 दिनों में पककर तैयार हो जाता है, जिससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पूरा समय मिल जाता है. प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक का शानदार उत्पादन और करीब 2500 रुपये प्रति क्विंटल का सरकारी रेट (MSP) मिलने से यह खेती भारी मुनाफे का सौदा साबित हो रही है.

Profitabale Paddy Farming: रामपुर जिले में धान की खेती किसानों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है. यहां करीब 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर में धान बोया जाता है, जिसमें से लगभग 90 हजार हेक्टेयर के बड़े हिस्से में किसान अकेले ‘पीआर 126’ धान की खेती कर रहे हैं. यह किस्म कम समय, कम पानी और कम लागत में बढ़िया पैदावार देने के लिए किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है.

जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा के मुताबिक, पीआर 126 धान सिर्फ 90 से 93 दिनों में पककर तैयार हो जाता है. इससे फसल जल्दी कट जाती है और किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पूरा समय मिल जाता है. यह धान कम पानी और कम खाद में भी प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक पैदावार दे देता है. बाजार में इस बार इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) करीब 2500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जिससे किसानों को कम लागत में सीधा और बड़ा मुनाफा हो रहा है.

मचेटी दवा से करें जंगली घास का सफाया
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि धान की फसल में उगने वाली अनचाही घास और मोथा पौधों का पोषण छीन लेते हैं. इसे रोकने के लिए किसान ‘मचेटी’ दवा (ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ईसी) का इस्तेमाल कर सकते हैं. रोपाई वाले धान में रोपाई के 2 से 3 दिन बाद और सीधी बुवाई में बुवाई के तुरंत बाद इसका छिड़काव करना चाहिए. प्रति एकड़ 800 मिलीलीटर से 1.2 लीटर दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें. दवा डालते समय खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए और इसे 3 से 4 दिनों तक बाहर न निकलने दें. इससे शुरुआती 30 से 40 दिनों तक खेत पूरी तरह साफ रहता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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