50-50 हजार रुपये में संभालते थे इंतजाम…कानपुर किडनी कांड में दो और आरोपी गिरफ्तार
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Kanpur Kidney Scam News: कानपुर के बहुचर्चित अवैध किडनी प्रत्यारोपण कांड मामले में पुलिस ने दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. रावतपुर थाना पुलिस ने गीतानगर क्रॉसिंग के पास से ये दो गिरफ्तारियां की है. गिरोह का सरगना रोहित तिवारी इन्हें ओटी संभालने और किडनी के सुरक्षित रखरखाव के लिए 50-50 हजार रुपये देता था. इस मामले में इन दोनों को मिलाकर अब तक कुल 13 आरोपी जेल जा चुके हैं, जबकि चार अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है.
कानपुर किडनी कांड मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार (इमे-AI)
कानपुर: यूपी के कानपुर में अवैध रूप से किडनी खरीदने-बेचने और ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है. रावतपुर थाने की पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गीतानगर क्रॉसिंग के पास से दो और आरोपितों, ओटी टेक्नीशियन सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है. इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में जेल जाने वाले आरोपितों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि गिरोह के चार अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस की दबिश अभी भी जारी है.
किडनी रखरखाव के लिए मिलते थे 50-50 हजार रुपये
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बहराइच के कैसरगंज के रहने वाले सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी, इस पूरे किडनीकांड गिरोह के सरगना गाजियाबाद निवासी रोहित तिवारी के लिए काम करते थे. पूछताछ में सामने आया है कि रोहित इन दोनों को ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था संभालने और किसी मरीज की किडनी निकाले जाने के बाद उसे दूसरे मरीज को लगाए जाने तक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी देता था. किडनी को बर्फ पर किस तरह रखना है और ट्रांसप्लांट होने तक उसका रखरखाव कैसे करना है, इस पूरे काम के लिए रोहित दोनों को 50-50 हजार रुपये देता था.
फेसबुक पोस्ट के जरिए हुआ था संपर्क
पुलिस पूछताछ में आरोपित सैफुद्दीन ने बताया कि उसने ओटी के काम के लिए फेसबुक पर एक पोस्ट डाली थी. जनवरी 2025 में इस पोस्ट को पढ़कर सरगना रोहित तिवारी ने लखनऊ के डालीगंज में उससे संपर्क किया था. इसके बाद सैफुद्दीन ने अपने साथी अखिलेश तिवारी को भी रोहित से मिलवा दिया. सैफुद्दीन ने कबूला कि वह कानपुर में चार किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुका है, जिसमें आहूजा हास्पिटल में दो, मेडीलाइफ हास्पिटल में एक और रामाशिव हास्पिटल में एक ट्रांसप्लांट शामिल है. 29 मार्च 2026 को हुए किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान भी ये दोनों ओटी में मौजूद थे. सैफुद्दीन ने यह भी बताया कि अली नाम के व्यक्ति को सभी लोग डॉक्टर ही समझते थे और वही किडनी ट्रांसप्लांट करता था.
दोनों आरोपी हैं पढ़े-लिखे, फरार डॉक्टरों की तलाश जारी
पकड़े गए आरोपियों के बैकग्राउंड की बात करें तो सैफुद्दीन ने ग्रेजुएशन करने के बाद ओटी टेक्नीशियन का कोर्स किया था. इसके बाद वह लखनऊ के डालीगंज स्थित केके हास्पिटल के अलावा दिल्ली के एक अस्पताल में भी काम कर चुका है. वहीं अखिलेश तिवारी ने स्नातक करने के बाद ग्वालियर से जीएनएम का कोर्स किया था. डीसीपी ने बताया कि पुलिस अब इस गिरोह के अन्य मुख्य राजदारों जैसे डॉ. अफजाल, डॉ. वैभव, अनुराग उर्फ अमित और प्रयागराज के रहने वाले नवीन पांडेय की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें