500 साल पुराना है यूपी का यह पेड़, मां चंद्रिका ने किया था रोपित, आयुर्वेद में है महत्व
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वरुण का वृक्ष न सिर्फ सुल्तानपुर के ऐंजर गांव वालों के लिए धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह गांव वालों के लिए पहले समय में औषधीय गुणों का भी काम करता था और अपने इन्हीं गुणों के कारण वरुण वृक्ष का वर्णन चरक और सुश्रुत संहिता में भी किया गया है. आयुर्वेद पद्धति में भी वरुण का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है.
सुल्तानपुरः भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक मान्यताओं वाला देश रहा है. यहां पर प्रकृति और पर्यावरण की पूजा भी की जाती रही है. वह चाहे नदियां रही हों,पर्वत रहे हों या फिर वृक्ष रहे हों. भारत में कई ऐसे वृक्ष हैं. जिनकी पूजा भारत की आस्था का एक अहम हिस्सा माना जाता है. यूपी के सुल्तानपुर जिले में भी एक ऐसा वृक्ष है, जिसे वरुण के नाम से जानते हैं ग्रामीणों के मुताबिक इस वृक्ष का इतिहास 500 साल पुराना है. यह वृक्ष सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर धनपतगंज ब्लॉक के ग्राम सभा ऐंजर में पड़ता है तो आईए जानते हैं क्या है इस वृक्ष का इतिहास.
500 साल पुराना है वृक्ष
ग्रामीण आसाराम जायसवाल लोकल 18 से बताते हैं कि उनके गांव में एक मां चंद्रिका देवी धाम के नाम से प्राचीन स्थल है, जहां पर अभी भी बहुत खंडित मूर्तियां रखी गई हैं. जो इस स्थल की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को बयां करती है. इस स्थल पर एक वरुण का पेड़ भी है जिसके बारे में उनके गांव वाले भी बताते हैं कि यह लगभग 500 साल पुराना पेड़ है और इस पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इस पेड़ को किसी आम इंसान ने रोपित नहीं किया था बल्कि मां चंद्रिका देवी की कृपा से यह पेड़ रोपित गया था.आसाराम आगे बताते हैं कि धार्मिक दृष्टिकोण से यह पेड़ काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर न सिर्फ गांव वाले दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं बल्कि आसपास के अन्य इलाकों के लोग भी वरुण वृक्ष की पूजा करने के लिए आते हैं.
आस्था का है प्रतीक
वरुण का वृक्ष न सिर्फ सुल्तानपुर के ऐंजर गांव वालों के लिए धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह गांव वालों के लिए पहले समय में औषधीय गुणों का भी काम करता था. अपने इन्हीं गुणों के कारण वरुण वृक्ष का वर्णन चरक और सुश्रुत संहिता में भी किया गया है. आयुर्वेद पद्धति में भी वरुण का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि वरुण के वृक्ष की छाल पीने से छोटी पथरी भी निकल जाती है. इसके साथ ही आंतरिक घाव भी इससे ठीक हो जाते हैं.
ग्रामीण रामचंद्र तिवारी लोकल 18 से बताते हैं कि यह वृक्ष 500 सालों से भी अधिक पुराना है. यहां पर दिखाई दे रहे इस वृक्ष को मां चंद्रिका देवी ने रोपित किया था. अगर आप भी वरुण के इस वृक्ष के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से धनपतगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव ऐंजर पहुंचना होगा. वहां पर एक चंद्रिका देवी धाम स्थल है और इस स्थल के बगल यह प्राचीन वृक्ष मौजूद है. इस वृक्ष में अभी भी फूल खिलते हैं. जो कि सफेद रंग में होता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें