51 शक्तिपीठों से अलग, सबसे शक्तिशाली है मां विंध्यवासिनी धाम, जानें मान्यता
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मां विंध्यवासिनी के बारे में कहा जाता है कि विंध्य क्षेत्र के जैसा क्षेत्र इस पूरे ब्रह्मांड में नहीं है. विंध्य पर्वत पर बिना सिद्धि किए साधना अधूरी रहती है. यह पर्वत विशेष है. यहां पर प्रभू राम के आगमन के प्र…और पढ़ें
मां विंध्यवासिनी के बारे में कहा जाता है कि विंध्य क्षेत्र के जैसा क्षेत्र इस पूरे ब्रह्मांड में नहीं है. विंध्य पर्वत पर बिना सिद्धि किए साधना अधूरी रहती है. यह पर्वत विशेष है. यहां पर प्रभू राम के आगमन के प्रमाण है. देवी-देवता हो या ऋषि. सब मां के दर्शन के लिए लालायित रहते थे. मां की चार पहर की आरती होती है. मां चार रूपों में दर्शन देती है. यहां हर आरती के अलग-अलग फल मिलते हैं. विंध्यधाम के विद्यवान आचार्य पं. अनुपम महराज ने बताया कि मां विंध्य पर्वत पर वास करनी वाली मां विंध्यवासिनी है. मां ज्योति स्वरूपा है. मणिद्वीप पर मां सशरीर विराजमान है.
पं. अनुपम महराज ने बताया कि आठ भुजाओं वाली मां शेर पर सवार है. संपूर्ण जगत में मां के धाम के जैसा कोई विग्रह नहीं है. यह सिद्धपीठ है. यहां पर कामना करने मात्र से इच्छा पूरी होती है. यहां सोचने मात्र से ही काम पूरा हो जाता है. यह अलौकिक दरबार है. यहां ब्रहा, विष्णु और महेश लाइन लगाकर दर्शन के लिए लालायित होते हैं. मां सर्वोच्य शिखर पर विराजमान है. धन-धान्य, पुत्र, यश व कीर्ति को देने वाली है. यह मां के धाम को अतिविशेष बनाता है.
ये करें अर्पित
पं. अनुपम महराज ने बताया कि मां के धाम में कुमकुम और चंदन बहुत प्रिय है. मां को लाल चुनरी अतिप्रिय है. मां के धाम में घंटा बजाने या दान देने से आपके जीवन में यश-कीर्ति बढ़ता है. यह स्थान विंध्य पर्वत का सिर है. यहीं पर गंगा शयन करती है और मां का अलौकिक व प्राचीन धाम भी है. साधना, तप और सिध्द्धि प्राप्त करने के लिए यहां पर देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर से साधक आते हैं और विशेष पूजन व अनुष्ठान करते हैं.