77 साल के शख्स ने नींबू के एक पेड़ से बनाया 30 लाख का टर्नओवर, अब खुला राज
बलिया: यूपी के बलिया जिले में एक ऐसा किसान भी है, जिसने उपहार में मिले एक नींबू के पौधे से पूरी नर्सरी तैयार कर व्यावसायिक रूप से अपनी एक अलग पहचान बना ली है. दरअसल, हुआ यूं कि बलिया मीरीगिरी गांव के रहने वाले 77 वर्षीय जेपी पांडेय को प्रयागराज में नींबू का एक छोटा सा पौधा उपहार के तौर पर मिला.
जेपी पांडेय ने मामूली नींबू का पौधा समझकर इसे अपने बगीचे में लगा दिया, गुजरते वक्त के साथ नींबू के पेड़ में फल आने लगे. लेकिन जेपी पांडेय के लिए नींबू का ये पौधा कल्पवृक्ष साबित हो गया. क्योंकि नींबू के इस पेड़ में 100 से 200 नहीं, बल्कि 2 हजार नींबू के फल उग आए. फिर कहते हैं कि चमत्कार को ही नमस्कार किया जाता है.
पेड़ में फलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि टहनियां भी टूटने लगी. नींबू का स्वाद खट्टा जरूर होता है पर जेपी पांडेय के लिए यह मीठा साबित हो गया और यही से पेशे से अधिवक्ता जेपी पांडेय ने एक नई शुरुआत की. अब इलाके के लोग नींबू से लगे हरे भरे पेड़ को देखकर इतने खुश हुए कि ऐसे ही पेड़ की डिमांड करने लगे. जेपी पांडेय ने नींबू के एक पेड़ से कलम बनाना शुरू किया और कई हजार पौधें तैयार कर लिए, लगभग 1200 नींबू के पेड़ उनके बगीचे में फल दे रहे हैं और कई हजार पौधें बेच भी दिए हैं. आइए जानते हैं इनके सफलता की प्रेरक कहानी…
बांसडीह तहसील अंतर्गत मिरीगिरी गांव निवासी और UP के धाकड़ किसान जयप्रकाश पांडेय ने कहा कि साल 2018 से खेती किसानी में वृद्धि हुई, उससे पहले यह वकालत करते थे. हालांकि, यह पहले भी खेती बहुत छोटे स्तर पर खेती करते थे. इनका उम्र लगभग 77 साल हो गया हैं. यह मुख्य रूप से जैविक खेती करते हैं. इनकी नींबू की खेती का शुरुआत केवल एक पौधे से हुआ था. इनको इलाहाबाद से कागजी नींबू का किस्म एक पौधा गिफ्ट के रूप में मिला था.
इन्होंने नींबू का केवल एक पौधा लगाया जिसमें इतना फल आया कि तना टूटने लगा था. लोगों के मांग के हिसाब से इन्होंने पौधे की 51 ग्राफ्टिंग की उसके बाद 31 ग्राफ्टिंग इन्होंने पड़ोसियों में बांट दिया और खेत में उन्होंने रोप दिया. इनके मित्र जनेश्वर मिश्र के दामाद रिटायर्ड सेलटेक्स कमिश्नर राम बच्चन मिश्रा ने इन्हें सुझाव दिया कि इस नींबू के पेड़ को आप बढ़ाइए जिससे कि ज्यादा मुनाफा मिले और उनके मित्र ने इनको खेती के साथ नर्सरी लगाकर पौधे बेचने की सलाह भी दी.
फिर इनकी कमाई डबल हो गई. इन्होंने ₹18,500 का नींबू बेचा और एक क्विंटल नींबू का अचार डाल दिया. एक नींबू के पेड़ से 2000 से 2500 नींबू इनको मिल जाता है. अब इनके खेत में 1200 नींबू के पौधे उपलब्ध है, जो बंपर उत्पादन दे रहे हैं. अभी तक इन्होंने 5000 से 8000 नींबू के पौधे बेच दिए है. इस जैविक प्राकृतिक खेती बाड़ी में इन्हें बहुत सुकून मिलता है. इनका एक नींबू ₹2.5 से ₹3 के बीच बिकता है. जो व्यापारी 20 हजार नींबू से ऊपर लेकर जाते हैं, उन्हें ₹200 सैकड़ा, 10,000 नींबू के लिए ₹225 सैकड़ा और जो व्यापारी 5000 से ऊपर नींबू लेकर जाते है. उनको ₹250 सैकड़ा के हिसाब से दिया जाता है.
इनकी पत्नी लॉ ग्रेजुएट हैं और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की प्रोडक्ट है. वह सड़क के किनारे 5:00 बजे सुबह से दो-तीन बजे शाम तक नींबू बेचती हैं. ताकि आने-जाने वाले लोगों को यह जानकारी हो जाए कि, नींबू तैयार हो चुका है.
यह किसान मधुमक्खी पालन भी किया है. जिससे परागण सही होने के कारण नींबू का उत्पादन डबल हो रहा है. यह खेत में किसी भी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते है. यह खुद गिर और साहीवाल नस्ल की गाय पाले हुए है, उसी के मूत्र और गोबर आदि से प्राकृतिक खाद बनाकर बंपर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं.
अगर एक पौधें से लगभग 2500 नींबू मिल रहे हैं, तो 1200 पौधे से 30 लाख नींबू के फल मिलेंगे. यानि यह किसान नर्सरी के पौधें बेचने के अलावा अगर केवल एक नींबू पर 50 पैसा ही मुनाफा कमा रहा हो तो भी यह किसान 15 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा रहा है.