वृंदावन के इस मंदिर में साड़ी-ब्लाउज पहन दर्शन देते हैं महादेव, गोपी के रूप में होती है पूजा, जानिए मान्यता

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वृंदावन के इस मंदिर में साड़ी-ब्लाउज पहन दर्शन देते हैं महादेव, गोपी के रूप में होती है पूजा, जानिए मान्यता


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Vrindavan Gopeshwar Mahadev Mandir: वृंदावन के गोपेश्वर महादेव मंदिर में चार पहर की अनोखी आरती होती है, जिसमें शिवजी चार अलग-अलग रूपों में दर्शन देते हैं. गोपी रूप में पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति और मनोकाम…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • गोपेश्वर महादेव मंदिर में चार पहर की अनोखी आरती होती है.
  • शिवजी गोपी रूप में दर्शन देते हैं, सभी पापों से मुक्ति मिलती है.
  • पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, भक्त सालभर इंतजार करते हैं.
निर्मल कुमार राजपूत / मथुरा : वृंदावन के गोपेश्वर महादेव के दरबार में परंपराएं भी अनोखे अंदाज में मनायी जाती है. यहां होने वाली चार पहर आरती अनोखी आरती है. इस आरती में गोपेश्वर महादेव चार अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों दर्शन देते हैं. यहां भोलेनाथ कभी शक्ति के रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं, तो कभी मोहिनी रूप धारण कर कर अपने मोहिनी रूप से मोहित कर देते हैं. गोपी रूप के साथ बाबा दूल्हा सरकार अपने सौंदर्य की छठा बिखरते हैं. हर कोई उनकी एक झलक झलक पाने के लिए आतुर होता दिखाई देता है. बाबा के भक्त इस दिन लिए सालभर का इंतजार करते हैं. आरती से पहले गोपेश्वर महादेव के सभी मांगलिक कार्यक्रम किए जाते हैं. जिसमें  एक तरफ वर पक्ष होता है और एक तरफ वधु पक्ष होता है.

गोपेश्वर महादेव की गोपी रूप में ही होती है पूजा
इस मंदिर में नाक में नथ और पूरे सोलह श्रृंगार देखकर आप भगवान शिव को शायद ही पहचान पायेंगे. मगर आज हम आप को बताते हैं कि ये भगवान कौन हैं. जो साड़ी, ब्लाउज, चूड़ी पहन पूरा सोलह श्रृंगार करते हैं. गोपेश्वर महादेव की गोपी रूप में ही पूजा की जाती है. माना जाता है कि पूजा करने से सभी पापो से मुक्ति  मिलती है. वहीं सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

गोपेश्वर महादेव मंदिर के सेवायत पुजारी अर्पित गोस्वामी ने मंदिर की मान्यता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जब द्वापर में भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था. तो उसे देखने जब ३३ करोड़ देवता आये, तो तब उन्हें जब ये पता चला कि यहां केवल महिला ही महारास देख  सकती हैं, तो सभी देवता वापस लौट गये. मगर शंकर भगवान जब समझाने के बाद भी नहीं माने, तो पार्वती ने उन्हें यमुना महारानी के पास भेज दिया. जहां यमुना जी ने भोले भंडारी को गोपी का रूप धारण कराया था. गोपी रूप धारण कर वह महारास करने लगे. जिन्हें भगवान कृष्ण ने पहचान लिया. महारास के बाद भगवान कृष्ण ने ख़ुद शंकर भगवान की पूजा की और राधा जी ने उन्हें वरदान दिया कि आज से लोग यहां गोपी के रूप में तुम्हारी पूजा होगी. तब से लेकर आज तक यहां लोग शिव को गोपी के रूप में पूजते हैं. पूरे  श्रृंगार का सामान भी इस मंदिर में चढ़ाया जाता है. मान्यताओ के अनुसार जो भी भक्त यहां आकर सावन के 4 सोमवार की पूजा करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. वहीं गोपी रूप में पूजा करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Lalit Bhatt

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक से सक्रिय. वर्तमान में News18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, वेबदुनिया समेत कई जगहों पर रिपोर्टिंग और डेस्क मे…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक से सक्रिय. वर्तमान में News18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, वेबदुनिया समेत कई जगहों पर रिपोर्टिंग और डेस्क मे… और पढ़ें

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