एक महीने में चौथी बाढ़, हर ओर तांडव…प्रयागराज संगम पर दो-दो दिन नहीं हो रही निषादराजों की बोहनी, Ground Report
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Prayagraj Flood Ground Report : एक महीने में चौथी बार आई बाढ़ ने लोगों की कमर तोड़ दी है. काम-धंधा ठप हो चुका है. जिनके 24 में से 14 घंटे संगम पर ही बीतते थे, वे ज्यादा बेहाल हैं. ये रिपोर्ट किसी कोई भी हिला दे…और पढ़ें
पूरे दिन नहीं खुलता खाता
बाढ़ के चलते प्रयागराज संगम लबालब डूबा हुआ है. बड़े हनुमान मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क पर दुकान लगाने में लोगों को परेशानी हो रही है. लोकल 18 से बात करते हुए जीत लाल निषाद बताते हैं कि बाढ़ के चलते उनका काफी नुकसान हुआ है. श्रद्धालु मिल नहीं रहे हैं. कमाई एकदम नहीं हो रही है. बाढ़ में अपनी नाव बचाकर बैठे हैं. जहां पहले रोज 500 तक की कमाई हो जाती थी, अब 100-200 मिलना भी मुश्किल हो गया है. लाल धारी निषाद नाविक हैं. लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि पिछले दो दिनों से यात्रियों का इंतजार कर रहा हूं कि कोई आए तो कुछ पैसा मिल जाए. लेकिन दो दिन से बोहनी तक नहीं हुई. एक महीने में चार बार बाढ़ ने हमारी कमर तोड़ दी है. घर पर बच्चे इंतजार करते हैं कि पापा कुछ कमा के लाएंगे लेकिन बिना पैसों के कैसे कुछ ले जाएं.
क्या बताएं, कहां है संगम
इस बार में न केवल लोगों के घर डूबे हैं बल्कि नाविक अपनी नाव की सुरक्षा को लेकर भी परेशान हैं. उनकी नाव संगम पर पानी में डूब जाती है, जिसे खोजने के लिए 10 फीट गहराई तक नीचे जाना पड़ता है. लोकल 18 से छोटे लाल निषाद बताते हैं कि हमारी कमाई डाउन हो गई है. दो बार तो नाव डूब गई. उसका भी नुकसान झेलना पड़ रहा है. हनुमान जी पर जब भी पानी आता है तो संगम जाने वाले श्रद्धालु वापस हो जाते हैं. वह पूछते हैं संगम कहां है. हम क्या बताएं, संगम कहां है.
बैठे-बैठे कर रहे इंतजार
फूल माला बेचने वाले कमलेश निषाद बताते हैं कि संगम पर बाढ़ आने के बाद जगह इतनी कम हो जाती है कि हम लोगों को दुकान लगाने में भी परेशानी होती है. श्रद्धालुओं की संख्या कम हो जाने से फूल माला बेचने में कोई लाभ नहीं रह गया. बैठ के इंतजार करना पड़ता है. कमाई आधे से भी कम हो गई है. हमारा घर परिवार पूरी तरह प्रभावित है, जो इसी काम पर निर्भर है.