Business Idea: काला सोना है इस नस्ल की भैंस, पालने से न केवल दूध बढ़ेगा, बल्कि कारोबार में भी लग जाएंगे चारचांद

0
Business Idea: काला सोना है इस नस्ल की भैंस, पालने से न केवल दूध बढ़ेगा, बल्कि कारोबार में भी लग जाएंगे चारचांद


Last Updated:

Murrah breed buffalo: मुर्रा नस्ल की भैंस दूसरी भैंसों की तुलना में काफी अलग होती है. इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है. इनके सिर, पूंछ और पैरों के बाल का रंग सुनहरा, गर्दन और सिर पतला, स्तन भारी और लंबे होते है. नाक घुमावदार होती है, जो इसे दूसरी नस्ल की भैंसों से अलग पहचान दिलाती है.

Dairy Farming: पशुपालन समृद्धि का द्वार खोलने के साथ ही स्वरोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. पशुपालन का काम करके लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. अब ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र के लोग और पढ़े-लिखे युवा भी इसके जरिए अपनी किस्मत बदल रहे है. वे गाय, भैंस और बकरी का पालन बड़े स्तर पर कर रहे है. भैंस पालन करने वाले पशुपालकों को उन्नत नस्ल की जानकारी न होने के कारण उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसीलिए आज हम उन्हें भैंस की एक खास उन्नत नस्ल के बारे में बताने जा रहे है, जिसका पालन करके कोई भी अच्छा मुनाफा कमा सकता है.

रायबरेली के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी) बताते है कि मुर्रा नस्ल की भैंस दूसरी भैंसों की तुलना में काफी अलग होती है. इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है. मुर्रा नस्ल की भैंस के जलेबी आकार के छोटे सींग होते हैं, जिनमें नुकीलापन भी रहता है. इनके सिर, पूंछ और पैरों के बाल का रंग सुनहरा, गर्दन और सिर पतला, स्तन भारी और लंबे होते है. नाक घुमावदार होती है, जो इसे दूसरी नस्ल की भैंसों से अलग पहचान दिलाती है.

हरियाणा से है इसकी पहचान
इंद्रजीत वर्मा बताते है कि मुर्रा नस्ल की भैंस की उत्पत्ति मुख्य रूप से हरियाणा से मानी जाती है. बढ़ते पशुपालन व्यवसाय की वजह से पंजाब, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन किसान करके अच्छा मुनाफा कमा रहे है. बाजारों में ये भैंस लगभग 60 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक मिलती है.

काला सोना है ये
मुर्रा नस्ल की भैंस 1 दिन में लगभग 22 से 25 लीटर तक दूध देती है. इसीलिए इसे बेहद अधिक दुग्ध उत्पादन वाली भैंस माना जाता है. जो एक ब्यांत में लगभग 2800 से 3000 लीटर तक का दुग्ध उत्पादन करती है. यही कारण है कि इसे काला सोना भी कहा जाता है. इसे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम जैसे खुंडी और डेली के नाम से भी जाना जाता है.

Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. डिजिटल में 7 साल से ज्यादा का अन…और पढ़ें

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. डिजिटल में 7 साल से ज्यादा का अन… और पढ़ें

homeagriculture

काला सोना है इस नस्ल की भैंस, कारोबार में लग जाएंगे चारचांद, जानें कैसे



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *