Business Idea: काला सोना है इस नस्ल की भैंस, पालने से न केवल दूध बढ़ेगा, बल्कि कारोबार में भी लग जाएंगे चारचांद
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Murrah breed buffalo: मुर्रा नस्ल की भैंस दूसरी भैंसों की तुलना में काफी अलग होती है. इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है. इनके सिर, पूंछ और पैरों के बाल का रंग सुनहरा, गर्दन और सिर पतला, स्तन भारी और लंबे होते है. नाक घुमावदार होती है, जो इसे दूसरी नस्ल की भैंसों से अलग पहचान दिलाती है.
रायबरेली के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी) बताते है कि मुर्रा नस्ल की भैंस दूसरी भैंसों की तुलना में काफी अलग होती है. इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है. मुर्रा नस्ल की भैंस के जलेबी आकार के छोटे सींग होते हैं, जिनमें नुकीलापन भी रहता है. इनके सिर, पूंछ और पैरों के बाल का रंग सुनहरा, गर्दन और सिर पतला, स्तन भारी और लंबे होते है. नाक घुमावदार होती है, जो इसे दूसरी नस्ल की भैंसों से अलग पहचान दिलाती है.
इंद्रजीत वर्मा बताते है कि मुर्रा नस्ल की भैंस की उत्पत्ति मुख्य रूप से हरियाणा से मानी जाती है. बढ़ते पशुपालन व्यवसाय की वजह से पंजाब, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन किसान करके अच्छा मुनाफा कमा रहे है. बाजारों में ये भैंस लगभग 60 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक मिलती है.
काला सोना है ये
मुर्रा नस्ल की भैंस 1 दिन में लगभग 22 से 25 लीटर तक दूध देती है. इसीलिए इसे बेहद अधिक दुग्ध उत्पादन वाली भैंस माना जाता है. जो एक ब्यांत में लगभग 2800 से 3000 लीटर तक का दुग्ध उत्पादन करती है. यही कारण है कि इसे काला सोना भी कहा जाता है. इसे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम जैसे खुंडी और डेली के नाम से भी जाना जाता है.
काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. डिजिटल में 7 साल से ज्यादा का अन…और पढ़ें
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