बलिया में आज भी हैं रंगरेज, अंग्रेजों के पहले से बिखेर रहे रंगों का जादू, जानिए इतिहास…
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Ballia News: बलिया के रंगरेज मोहम्मद नवाब अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कपड़ों को प्राकृतिक रंगों से नया जीवन देते हैं, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर जीवित है.
रंगरेज मोहम्मद नवाब ने कहा कि वह साधारण और बेरंग कपड़ों को अपने हुनर से इस तरह रंगते हैं कि वे एकदम नया जीवन पा जाते हैं. वे सूती, रेशमी और अन्य कपड़ों को प्राकृतिक और खास रंगों से इस कदर रंगते हैं कि हर कोई देखता रह जाता है. इनके द्वारा बनाए गए रंगीन दुपट्टे, चुनरी, कुर्ते और साड़ियां लोगों को खूब पसंद आती हैं. अक्सर लोग महंगे कपड़े खरीदने हैं, जो बीच में रंग छोड़ देने के कारण बेकार हो जाते हैं, लेकिन रंगरेज इन बेकार कपड़ों को खूबसूरत रंग देकर कामयाब बनाते हैं.
उक्त रंगरेज का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की दी हुई उनके लिए धरोहर है. बताया कि इनके दादा-परदादा भी यही काम करते थे. उनके हाथों में जो कला थी, वही इन्हें विरासत में मिली है. आज भी बलिया के विभिन्न हिस्सों में रंगरेजों की मौजूदगी देखी जा सकती है, हर दिन इनकी मांग रहती है. बलिया के ये रंगरेज न केवल अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी जिंदा रखे हुए हैं, जो अपने आप में सराहनीय है. यह लोग खासकर जो कपड़े रंग छोड़ देते हैं, उसको रंगीन चमकदार और नया रूप देते हैं.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें
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