गाय-भैंस को खिला दें ये कमाल की चॉकलेट, बहने लगेंगी दूध की नदियां! बन जाएंगे मालामाल

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गाय-भैंस को खिला दें ये कमाल की चॉकलेट, बहने लगेंगी दूध की नदियां! बन जाएंगे मालामाल


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Animal Chocolate: गोंडा में आई. वी. आर. आई. बरेली की तकनीक से डॉ अभिषेक मिश्रा द्वारा बनाई पशु चॉकलेट से दूध उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ रही है. जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़ी है.

गोंडा: हमारे देश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई तरह के नुस्खे अपनाए जाते हैं. किसानों की कोशिश होती है कि उनके पशु ज्यादा से ज्यादा दूध दें और स्वस्थ रहें. अब एक नया तरीका सामने आया है, जिसमें पशुओं को पशु चॉकलेट खिलाने से दूध की मात्रा बढ़ जाती है.  गोंडा के पशुपालन विभाग में आई. वी. आर. आई. बरेली की तकनीक से पशुओं के लिए  वैज्ञानिक विधि से पशु चॉकलेट का उत्पादन किया जा रहा है. पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ अभिषेक मिश्रा ने बताया कि यह पशु चॉकलेट कई प्रकार के पदार्थ जैसे चोकर, चुनी, मिनरल मिक्सर, विटामिन, नमक, खली, यूरिया आदि का संतुलित मिश्रण बनाकर यूएमएमबी मेकिंग मशीन में डालकर ईट के आकार का तैयार किया जाता है. इसको पशुओं को प्रतिदिन चाटने के लिए दिया जाता है. जिससे पशुओं के पाचन क्रिया में काफी सुधार होता है. इससे दुग्ध उत्पादन और फैट की मात्र में वृद्धि होता है.

कैसे तैयार होती है ये चॉकलेट
संस्थान के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि यह चॉकलेट दिखने में ईंट जैसी होती है. इसे बनाने के लिए कई प्रकार के पौष्टिक पदार्थों का मिश्रण तैयार किया जाता है. इसमें चोकर, चुनी, मिनरल मिक्सर, विटामिन, नमक, खली और थोड़ी मात्रा में यूरिया मिलाई जाती है. इन सभी चीजों को यूएमएमबी मेकिंग मशीन  में डालकर एक ठोस आकार दिया जाता है. तैयार होने के बाद इस चॉकलेट को पशुओं को रोज़ाना चाटने के लिए दिया जाता है. यह उनके लिए किसी टॉनिक की तरह काम करता है. इससे पशुओं की पाचन क्रिया बेहतर होती है. शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और सबसे खास बात यह है कि इससे दूध उत्पादन और दूध में वसा प्रतिशत दोनों बढ़ जाते हैं.

डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि सामान्य चारे और दाने से पशुओं को उतनी ऊर्जा और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. जितनी इस चॉकलेट से मिल जाते हैं. यही कारण है कि पशु ज्यादा दूध देने लगते हैं और उनकी सेहत भी पहले से बेहतर हो जाती है.

क्या है खासियत

पशु चॉकलेट की खासियत यह है कि इसे बनाना आसान है और यह लंबे समय तक खराब भी नहीं होती है. किसान इसे अपने घर पर भी तैयार कर सकते हैं. या फिर संस्थान से खरीद सकते हैं. यह सामान्य चारे की तुलना में किफायती भी है. क्योंकि इसमें संतुलित मात्रा में मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं. इस तकनीक से न सिर्फ दूध की मात्रा बढ़ रही है बल्कि उसकी क्वालिटी भी सुधर रही है. इससे किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है. गोंडा समेत आस-पास के गांवों के कई किसान इस चॉकलेट का इस्तेमाल कर चुके हैं और वे बता रहे हैं कि पहले की तुलना में अब उनके पशु ज्यादा दूध दे रहे हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें

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