राजशाही गई लेकिन इतिहास जिंदा, ये इमारतें आज भी राजा के रसूख की देती है गवाही
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Pilibhit News: पीलीभीत शहर को लेकर किंवदंती है कि इस शहर को बंजारों ने बसाया है. मगर यहाँ लंबे समय तक रुहेलाओं का शासन रहा. इसके साथ ही साथ यह भी माना जाता है कि ललिता प्रसाद और उनके छोटे भाई साहू हरिप्रसाद शहर के प्रमुख व्यवसाई हुआ करते थे.
वैसे तो पीलीभीत के तमाम तरह के परंपरागत उद्योग चला करते थे. मगर चीनी मिल की स्थापना के साथ इलाके को लोगों को रोजगार के साथ ही इलाके के गन्ना किसानों को भी बाजार मिलने लगा. इस फैक्टरी की स्थापना वर्ष 1909 में हुई थी. 100 वर्षो से भी अधिक पुरानी यह चीनी मिल आज भी जिले की सबसे प्रमुख मिल है. वहीं गन्ना किसानों के भुगतान के मामले में भी यह चीनी मिल सबसे बेहतर है.

आज भले ही शहर में एक से बढ़कर एक घर या इमारतों का निर्माण हो गया है मगर एक इमारत आज भी सबके आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. साहू परिवार के घर को राजा साहब की कोठी के नाम से जाना जाता है. यह कोठी शहर के चौक बाजार में स्थित है, इस घर को साहू परिवार ने वर्ष 1919 में बनवाया था. इन दिनों इस घर को हेरिटेज होटल बनाने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं.

शहर के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक राधारमण मंदिर को भी राजा साहब के मंदिर के नाम से जाना जाता है. पीलीभीत के चौक बाजार में स्थित राधारमण मन्दिर काफी प्राचीन है. इस मंदिर का निर्माण पीलीभीत के तत्कालीन राजा लालता प्रसाद और हरि प्रसाद ने बनाया था. ऐसा माना जाता है कि राजाओं ने कुछ मनोकामना मांगी थी और राजाओं की आस्था राधारमण में बहुत अधिक थी. मनोकामना के पूर्ण होने के बाद उन्होंने इस मन्दिर की स्थापना की थी. मन्दिर में लगे शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण सम्वत 1853 ( सन 1796 ) में हुआ था.

दरअसल जिसे शहर और प्रदेशवासी आज ललित हरि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के नाम से जानते हैं उसकी स्थापना वर्ष 1899 में पीलीभीत शहर में संस्कृत और आयुर्वेद का ज्ञान प्रदान करने के लिए की गई थी. शहर के साहू ललिता प्रसाद व उनके छोटे भाई साहू हरि प्रसाद ने इस संस्थान के लिए भूमि दान में दी थी. यह महाविद्यालय राज्य और देश के सबसे पुराने आयुर्वेद महाविद्यालयों में से एक है.

पीलीभीत शहर की चौक बाजार के समीप स्थित आलीशान कोठी के साथ ही साथ साहू परिवार का एक गार्डन हाउस भी शहर के छतरी चौराहे के समीप स्थित है. शहर वासियों के बीच यह घर राजा साहब की बगिया के नाम से प्रसिद्ध है. इसके पड़ोस में बसी कॉलोनी अधिकांश लोग आज भी राजा बाग कॉलोनी के नाम से जानते हैं.