पश्चिमी यूपी में गेहूं की बुवाई का गोल्डन टाइम… बस 4 बातों का रखें ध्यान! बंपर होगी पैदावार

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पश्चिमी यूपी में गेहूं की बुवाई का गोल्डन टाइम… बस 4 बातों का रखें ध्यान! बंपर होगी पैदावार


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Wheat Farming Tips : पश्चिमी यूपी में गेहूं की बुवाई का गोल्डन टाइम शुरू हो चुका है. अगर किसान इस दौरान सिर्फ 4 अहम बातों का ध्यान रखें यानि सही समय, बेस्ट किस्म का बीज, संतुलित खाद और नमी प्रबंधन तो फसल बंपर उत्पादन दे सकती है. समय पर की गई बुवाई और सही तकनीक अपनाने से पैदावार में तेजी से बढ़ोतरी होती है.

शाहजहांपुर : वैसे तो उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई का सही समय क्षेत्र और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है. आमतौर पर राज्य में गेहूं की बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे मेरठ, सहारनपुर और अलीगढ़ क्षेत्रों में बुवाई का आदर्श समय 25 अक्टूबर से 20 नवंबर तक माना जाता है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे गोरखपुर, देवरिया और बलिया में 15 नवंबर से 30 नवंबर तक बुवाई करना बेहतर होता है. ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई के लिए यह समय सबसे उपयुक्त है. इस समय अगर गेहूं की फसल की बुवाई की जाती है तो किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा ले सकते हैं.

खास बात यह है कि इस समय अगर गेहूं की बुवाई की जाती है तो पौधों की ग्रोथ अच्छी होगी और उत्पादन भी अच्छा मिलेगा, लेकिन गेहूं की बुवाई करते समय खेत की तैयारी अच्छी तरह से करनी चाहिए और बीज उपचार करने के बाद ही गेहूं की फसल की बुवाई करें.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि गेहूं की बुवाई करते समय किसानों को उन्नत किस्म का चयन करना चाहिए, बीज किसी पंजीकृत दुकान से ही खरीदें. ध्यान रखें कि बीज प्रमाणित होना चाहिए, अच्छी गुणवत्ता का बीज की बुवाई करने से किसानों को अच्छा उत्पादन मिलता है. इसके अलावा किसानों को फसल की बुवाई करते समय बीज उपचार भी करना चाहिए. बीज उपचार एक अहम प्रक्रिया है, जिससे फसल में कीट और रोग कम आते हैं.

कितना जरूरी है बीज उपचार करना
गेहूं का बीज उपचारित करना एक महत्वपूर्ण कृषि क्रिया है, जो फसल की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार कर सकता है. बीज उपचार से बीजों को फफूंद, बैक्टीरिया और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है. बीज उपचार से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है. उपचारित बीजों से उगने वाले पौधे स्वस्थ और मजबूत होते हैं, जिससे फसल की वृद्धि में तेजी आती है. बीज उपचार से फसल की पैदावार में वृद्धि होती है क्योंकि पौधे बीमारियों और कीटों से मुक्त होते हैं. किसान रासायनिक और जैविक तरीके से बीज उपचार कर सकते हैं.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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