Mustard Farming : सरसों की पत्तियों पर सफेद फफोले? तुरंत सावधान, बर्बाद हो जाएगी पूरी फसल, करें ये 3 काम
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Mustard crop care tips : सरसों की बुवाई के दौरान ही इस रोग से बचाव के लिए कुछ उपाय कर लें. जैसे सरसों के बीज का ट्राईकोडरमा से उपचारित करने के बाद ही बुवाई करें. अगर ऐसा नहीं कर पाएं हैं तो फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर रिडोमील एम जेड 2% का घोल बनाकर खेतों में छिड़काव कर दें. इस विधि से भी इस रोग को रोका जा सकता है. लेकिन अगर तब भी राहत न मिले तो क्या करें. आइये जानते हैं.
रायबरेली. रबी के सीजन में सरसों का तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान है. इस फसल के लिए सर्दियों का मौसम बेहतर माना जाता है. लेकिन तापमान में बदलाव के कारण इसकी खेती करने वाले किसानों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि सरसों की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए फसल में लगने वाले रोग और कीटों का विशेष ध्यान दिया जाए. साथ ही समय-समय पर खेतों की देखरेख करते रहें, ताकि फसल में लगने वाले रोग और कीट का समय रहते उपचार किया जा सके. कृषि के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि सरसों की फसल में कई तरह के रोग और कीट लगने का खतरा रहता है. ऐसे में फसल की शुरुआती समय से ही निगरानी करना बेहद जरूरी होता है.
सरसों की फसल में विभिन्न प्रकार के फफूंद जनित रोग लगते हैं, जो बीज, मिट्टी और अधिक नमी के कारण फैलते हैं. इनकी वजह से फसल की पैदावार प्रभावित होती है. ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करना और रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर उचित कीटनाशक का छिड़काव करना जरूरी होता है. सरसों की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों में से सफेद रोली भी है, जो सरसों की पैदावार प्रभावित करता है.
शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि सफेद रोली रोग सरसों की फसल के लिए बेहद खतरनाक होता है.यह रोग बीज एवं मिट्टी जनित होता है. वह बताते हैं कि यह बीज एवं मिट्टी के साथ ही अधिक नमी होने पर फैलता है.वह बताते हैं कि इस रोग का खतरा 30 से 40 दिन बाद ही दिखाई देने लगता है.
इस रोग के लक्षण और बचाव
सफेद रोली रोग में सरसों की पत्तियों की निचली सतह पर सफेद रंग के उभरे हुए धब्बे दिखाई देते हैं. पत्तियों के ऊपरी सतह पर पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं. जब यह रोग गंभीर होता है, तो पत्ती के दोनों तरफ सफेद धब्बे हो जाते हैं. धीरे-धीरे यह चूर्ण की तरह पत्तियों पर बिखरने लगते हैं. इससे पत्तियां सूखने लगती हैं. इसका प्रभाव इतना अधिक होता है कि यह फूल और फलियों को भी प्रभावित करता है. शिव शंकर वर्मा के मुताबिक, सरसों की फसल बुवाई के दौरान ही इस रोग से बचाव के लिए बीज का ट्राईकोडरमा से उपचारित करने के बाद ही बुवाई करें. यदि ऐसा नहीं करते हैं तो फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर रिडोमील एम जेड 2% का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें. यदि फसल पर इस रोग का प्रकोप अधिक है तो यह प्रक्रिया 10 दिन के अंतराल पर अपनाएं. इससे बचाव किया जा सकता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें