दुधारू पशु खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना होगा सिर्फ नुकसान
कानपुर: पशुपालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है. गाय-भैंस पालन से किसानों और पशुपालकों को नियमित आय मिलती है, लेकिन यह तभी संभव है जब पशु खरीदते समय पूरी सावधानी बरती जाए. थोड़ी-सी लापरवाही भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशुपालन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामजी गुप्ता के अनुसार, सही जानकारी और समझ के साथ खरीदा गया पशु ही लाभ देता है.
लोकल बाजार से ही खरीदें पशु
डॉ. गुप्ता बताते हैं कि पशु खरीदते समय सबसे पहली सलाह यह है कि बाहर की अनजान मंडियों से पशु न लें. अपनी लोकल बाजार या आसपास के भरोसेमंद व्यापारी से ही खरीदारी करें. लोकल बाजार से पशु लेने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि बाद में दूध कम निकले, पशु बीमार हो जाए या कोई और समस्या आए, तो व्यापारी से सवाल-जवाब किया जा सकता है. कई बार पशु को वापस करने या समझौते की गुंजाइश भी रहती है, जो दूर की मंडियों में संभव नहीं होता.
हमेशा दूध देने वाला पशु ही चुनें
पशु खरीदते समय यह देखना बेहद जरूरी है कि वह दूध दे रहा हो. इससे यह साफ हो जाता है कि पशु की दूध उत्पादन क्षमता कितनी है. केवल कागजों या बातों पर भरोसा न करें. अपने सामने पशु को दो-तीन बार दुह कर जरूर देखें. इससे दूध की मात्रा, थन की स्थिति और दूध की गुणवत्ता का सही अंदाजा लग जाता है.
प्रेग्नेंट पशु से करें परहेज
कई बार सस्ते या ज्यादा दूध का लालच देकर गर्भवती (प्रेग्नेंट) पशु बेच दिए जाते हैं. डॉ. गुप्ता के अनुसार, ऐसे पशु खरीदने से बचना चाहिए. लाने-ले जाने के दौरान गर्भपात का खतरा रहता है, जिससे पशु और मालिक दोनों को नुकसान होता है. इसके अलावा प्रसव के बाद दूध उत्पादन को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है.
सेहत, उम्र और रिकॉर्ड भी देखें
सही जानकारी से होगा फायदा
पशुपालन में मुनाफा तभी संभव है जब पशु सही चुना जाए. विशेषज्ञों की सलाह मानकर, जल्दबाजी से बचकर और पूरी जांच-पड़ताल के बाद खरीदा गया पशु लंबे समय तक अच्छा दूध देता है और परिवार की आमदनी बढ़ाता है. सावधानी और समझदारी ही पशुपालन की सफलता की असली कुंजी है.