‘बाहर लोग बोलते हैं- देखो हिजड़ा जा रहा है’, किन्नरों की जिंदगी कैसी बीतती है? कैमरे के सामने दर्द बयां
मिर्जापुर: हमारे समाज में पुरुषों और महिलाओं को विशेष महत्व दिया गया है. सामाजिक तौर पर जो सम्मान और इज्जत उन्हें मिलती है, शायद ही किन्नरों को मिलती हो. यह हमारा नहीं, बल्कि किन्नरों का कहना है. किन्नर संघ की अध्यक्ष मुस्कान ने बातचीत करते हुए कहा कि हम लोगों की जिंदगी में काफी कठिनाईयां रहती हैं. कोई हमसे इज्जत से बात नहीं करता है. सब देखते ही हिजड़ा और छक्का कहकर बुलाते हैं. हमारे साथ गलत भी होता है, लेकिन हमारा सुनने वाला कोई नहीं है. ऐसे कह लीजिए कि हम सामाजिक तौर पर अलग-थलग पड़े हुए हैं.
किन्नर संघ की अध्यक्ष मुस्कान ने लोकल 18 से बताया कि हम लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किलों से भरी हुई होती है. जब हम लोगों के घरों पर जाते हैं, तो काफी लोग इज्जत देते हैं, लेकिन कुछ बहुत ही बदतमीजी से पेश आते हैं. उनके लिए हम क्या ही कर सकते हैं. हम लोग बाहर निकलते हैं, तो लोग कहते हैं कि हिजड़े जा रहा है, किन्नर जा रहा है. किसी मोहल्ले में जाते हैं, तो अलग-अलग तरीके की बातें कसते हैं.
भगवान ने ऐसा बनाया तो क्या करें?
उन्होंने कहा कि दिल में बहुत तकलीफ होती है, लेकिन क्या ही कर सकते हैं. जब भगवान ने हम लोगों को ऐसे ही बनाकर भेजा है, तो हम क्या कर सकते हैं. हम लोग सुबह उठकर जजमानों के घर जाते हैं. फिर शाम में आते हैं. जजमान अच्छा हो तो दिन अच्छा हो जाता है, लेकिन जजमान अगर बदतमीजी करते हैं, तो दिन मायूसी में चला जाता है.
गलत पर कोई सुनने वाला नहीं
मुस्कान ने बताया कि हम लोगों के साथ जो गलत होता है. सोचते हैं कि किसी और के साथ गलत नहीं हो. हम लोग चाहते हैं कि सभी खुश रहें. हम लोगों के साथ गलत भी हुआ, लेकिन हम लोग किससे कहने के लिए जाएंगे. हम लोग किसी को कह नहीं सकते हैं, ना ही बोल सकते हैं. दर्द बहुत है, लेकिन किसको बताए. कोई सुनने वाला नहीं है.
उन्होंने कहा कि सरकार से कहेंगे कि हम लोगों के लिए विशेष इंतजाम किए जाए. कुछ सुविधाएं की जाए, ताकि हम लोगों का भी उत्थान हो सके. योजना के साथ ही कोई फोरम बनाया जाए, जहां पर हम लोगों की समस्याओं को सुना जाए और उनका समाधान कराया जाए. इससे हम लोगों को फायदा होगा.