गाजियाबाद में बढ़ी कच्चे माल की किल्लत, ठप हो सकते हैं कई प्रोजेक्ट्स

0
गाजियाबाद में बढ़ी कच्चे माल की किल्लत, ठप हो सकते हैं कई प्रोजेक्ट्स


Ghaziabad News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बादलों ने अब सीधे आपकी जेब पर वार करना शुरू कर दिया है. ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर दिल्ली से सटे औद्योगिक हब गाजियाबाद में दिखने लगा है. यहां प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतों में 20 फीसदी तक का भारी उछाल आया है. आलम यह है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स से लेकर आम घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान की लागत बढ़ गई है, जिससे करीब 50 हजार लोगों के रोजगार पर भी खतरे की तलवार लटक गई है.

क्यों बढ़ रहे हैं प्लास्टिक के दाम?
प्लास्टिक इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि प्लास्टिक का मुख्य आधार नेफ्था (Naphtha) होता है, जो कच्चे तेल (Crude Oil) का एक बाई-प्रोडक्ट है. खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई कम हो गई है. इसके अलावा, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर संकट मंडराने से मालवाहक जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट काफी बढ़ गई है. यही वजह है कि विदेशों से आने वाला कच्चा माल अब बहुत महंगा हो गया है.

गाजियाबाद की 3000 यूनिट्स पर असर
गाजियाबाद में प्लास्टिक का कारोबार बहुत बड़ा है. यहां साहिबाबाद, कविनगर, बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया, मोहन नगर और लोनी जैसे मुख्य केंद्रों में 3000 से अधिक छोटी-बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई यूनिट्स रजिस्टर्ड हैं. यहां की कुछ प्रमुख कंपनियों का व्यक्तिगत टर्नओवर ही 50 से 100 करोड़ रुपये के बीच है. वहीं, जिले में हर साल करोड़ों रुपये का दाना, पीपी (PP) और पीवीसी (PVC) आता है. इनकी कीमतें पहले 26 रुपये से 350 रुपये प्रति किलो तक थीं, लेकिन अब इनमें सीधा 20% का उछाल आ चुका है.

सरकारी प्रोजेक्ट्स और ठेकेदारों की बढ़ी मुसीबत
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि नगर निगम के प्रोजेक्ट्स भी इस महंगाई की चपेट में हैं. पाइपलाइन बिछाने का काम करने वाले ठेकेदारों का कहना है कि जब उन्हें टेंडर मिला था, तब पाइप की कीमतें काफी कम थीं. अब दाम 20 से 30 फीसदी बढ़ चुके हैं, जिससे पुराने रेट पर काम करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. अगर यही हाल रहा, तो शहर के कई जरूरी विकास कार्य बीच में ही रुक सकते हैं.

क्या छंटनी का दौर शुरू होगा?
गाजियाबाद इंडस्ट्रियल फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा के मुताबिक, डिमांड की तुलना में सप्लाई काफी कम आ रही है. इस सेक्टर से जिले के करीब 50,000 से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं. लागत बढ़ने और प्रोडक्शन कम होने की वजह से अब इन कर्मचारियों की छंटनी का खतरा भी बढ़ गया है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर कच्चे माल की कीमतें कम नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में प्लास्टिक से बनने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी. इसमें शामिल हैं घर में इस्तेमाल होने वाले PVC/CPVC पाइप, खाने-पीने के सामान की पैकेजिंग फिल्म. घरेलू मोल्डेड फर्नीचर (कुर्सी, मेज) और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले ऑटोमोटिव पार्ट्स.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *