आम के फल हो रहे काले और सख्त, हो सकती है ये कमी, 6 ग्राम सोडा-बोरॉन घोल से बचाएं फसल
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Mango Farming: आम के बागों से किसान अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे हैं. लेकिन यह समय किसानों को बाग की विशेष देखभाल करने की जरूरत है. इन दिनों आम के फलों पर काले धब्बे उभरने की समस्या तेज़ी से देखी जा रही है. अगर समय रहते सावधानी न बरती गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस समस्या को ‘कोयलिया रोग’ या ‘ब्लैक टिप’ कहा जाता है, जो मुख्य रूप से प्रदूषण और पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है. ऐसे में किसान नियमित रूप से बाग की देखभाल करते रहें.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि आम में कालापन आने का मुख्य कारण आसपास स्थित ईंटों के भट्टे होते हैं. भट्टों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस आम के फलों के लिए बेहद हानिकारक होती है. जब यह गैस बौर और छोटे फलों के संपर्क में आती है, तो फल के निचले हिस्से पर काले धब्बे बनने लगते हैं. इसके अलावा, मिट्टी में बोरॉन की कमी भी इस रोग को बढ़ावा देती है. लेकिन सही समय पर सही रसायनों का छिड़काव करके इस रोग से फसल को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है.

आम के फलों पर दिखने वाले काले धब्बे असल में ईंटों के भट्टों से निकलने वाले धुएं का जिनपरिणाम होते हैं. इस धुएं में मौजूद हानिकारक गैसें फल की कोशिकाओं को क्षति पहुंचाती हैं. इसके कारण फल का निचला हिस्सा काला और सख्त हो जाता है, जिससे फल की गुणवत्ता और बाज़ार दाम दोनों गिर जाते हैं. यह समस्या उन बागों में अधिक होती है जो भट्टों के एक से दो किलोमीटर के दायरे में स्थित होते हैं.

एक्सपर्ट ने इस समस्या से निपटने का एक सरल और सस्ता उपाय बताया है. इसके लिए किसानों को 6 ग्राम बोरॉन और 6 ग्राम कपड़े धोने वाला सोडा प्रति लीटर पानी में घोल तैयार कर लें. इस घोल को अच्छी तरह तैयार कर लें. इस घोल का छिड़काव आम के पेड़ों पर करने से ‘कोयलिया रोग’ को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है. यह घोल फलों को सुरक्षा कवच प्रदान करता है और उन्हें काला होने से बचाता है.
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आम के पेड़ काफी ऊंचे होते हैं, इसलिए छिड़काव के लिए टैंकर या प्रेशर स्प्रेयर का उपयोग करना सबसे अच्छा रहता है. किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि छिड़काव पूरे पेड़ पर समान रूप से हो, विशेषकर फलों वाले हिस्सों पर, पहला छिड़काव फल लगने की शुरुआत में और दूसरा 15 दिनों के अंतराल पर करना चाहिए.

रोग के लक्षण दिखने का इंतज़ार करने के बजाय, सावधानी के तौर पर पहले ही छिड़काव कर देना बेहतर होता है. अगर बाग के आसपास ईंट भट्टे सक्रिय हैं, तो निगरानी और भी ज़रूरी हो जाती है. समय पर उपचार न मिलने से पूरा फल सड़ सकता है और गिर सकता है. कृषि एक्सपर्ट की इस सलाह को अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल बचा सकते हैं, बल्कि बाज़ार में अपनी उपज का सही दाम ले सकते हैं.