अब वापस जाने का समय…छुट्टियां मनाकर पीलीभीत की तराई से विदा हुए विदेशी मेहमान
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Pilibhit News : मार्च की गर्मी बढ़ते ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व में रौनक थोड़ी कम होने लगी है. सर्दियों में दूर-दूर से आए हजारों प्रवासी पक्षी अब वापस अपने ठंडे इलाकों की तरफ निकल रहे हैं. तराई के वनों पर रिसर्च करने वाले स्वतंत्र शोधार्थी प्रतीक कश्यप ने लोकल 18 को बताया कि शारदा सागर और यहां की झीलों के किनारे जो पक्षी कुछ समय पहले तक अपनी मौजूदगी से माहौल बनाए हुए थे, वे अब अपने लंबे सफर की तैयारी में हैं. कुछ ने उड़ान भर ली है और बाकी भी अगले कुछ दिन में अलविदा बोल जाएंगे. आइये ऐसे ही छह परींदों के बारे में जानते हैं.
बार-हेडेड गूज : ये पक्षी अपनी लंबी यात्रा के लिए जाने जाते हैं. जैसे ही मार्च की धूप तेज होती है, ये समझ जाते हैं कि अब ठंडे इलाकों में वापस जाने का समय हो गया है. मार्च के बीच तक ये झीलों के किनारे बहुत सक्रिय हो जाते हैं और अपनी उड़ान के लिए झुंड बना लेते हैं, क्योंकि इन्हें हिमालय की ऊंची और कठिन चोटियों को पार करके अपने प्रजनन के ठिकानों तक पहुंचना होता है.

नदर्न पिनटेल : ये बत्तखें अपने प्रवास के प्रति बहुत अनुशासित होती हैं. जैसे ही तापमान बढ़ता है, ये यहां के जलाशयों को छोड़ना शुरू कर देती हैं. मार्च के पूरे महीने ये अपनी लंबी उड़ान भरते हुए उत्तर की ओर निकल जाती हैं. ये समूह में यात्रा करना पसंद करती हैं और मार्च खत्म होने तक ये पीलीभीत के पानी से लगभग गायब हो चुकी होती हैं.

स्टेपी ईगल : ये शिकारी पक्षी घास के मैदानों के ऊंचे स्थानों पर बैठना पसंद करते हैं. मार्च में जब गर्मी बढ़ने लगती है, तो इन्हें अपने शिकार का तरीका बदलना पड़ता है और ये लंबी वापसी की यात्रा के लिए तैयार हो जाते हैं. ये आसमान में गर्म हवाओं के झोंकों का फायदा उठाकर बहुत ऊपर उड़ते हैं और अप्रैल की शुरुआत से पहले ही लंबी दूरी तय करके अपने मूल इलाकों में पहुंच जाते हैं.
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ब्लू-थ्रोट : यह छोटा सा पक्षी देखने में जितना सुंदर है, इसका प्रवास भी उतना ही दिलचस्प है. मार्च में अपनी विदाई के समय, ये अपनी मधुर आवाज में चहचहाते हैं. जैसे-जैसे मौसम गर्म होता है, ये झाड़ियों के सुरक्षित ठिकानों को छोड़कर धीरे-धीरे अपनी लंबी उत्तर की यात्रा पर निकल पड़ते हैं. इनका व्यवहार इस समय काफी फुर्तीला हो जाता है क्योंकि इन्हें अपने अगले सफर के लिए काफी ऊर्जा की जरूरत होती है.

साइबेरियन स्टोनचैट : ये छोटे मेहमान अक्सर ऊंची टहनियों या तिनकों पर बैठे मिलते हैं. मार्च के मध्य तक आप देखेंगे कि ये पहले के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हो गए हैं, क्योंकि ये अपनी लंबी उड़ान के लिए शरीर में काफी चर्बी जमा कर लेते हैं. ये मार्च के अंत तक पीलीभीत के घास के मैदानों को पूरी तरह से अलविदा कह देते हैं और साइबेरिया की ओर अपना रुख कर लेते हैं.

रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड : अपने सुनहरे सिर के कारण ये झील की शोभा बढ़ाते हैं. जैसे ही मार्च का तापमान बढ़ने लगता है, इनका मन यहां के गर्म होते पानी से उबने लगता है. मार्च के बीच तक इनका व्यवहार बदलने लगता है और ये बड़े झुंडों में यहां से निकलकर अपने ठंडे प्रजनन स्थलों की ओर कूच कर जाते हैं, जिससे अचानक झीलों में इनकी संख्या कम नजर आने लगती है.