गाजियाबाद का ‘बुनकर मार्ट’ तैयार, अब बदलेगा शिल्पकारों की तकदीर

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गाजियाबाद का ‘बुनकर मार्ट’ तैयार, अब बदलेगा शिल्पकारों की तकदीर


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Bunkar Mart Ghaziabad: गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम में ₹200 करोड़ की लागत से बुनकर मार्ट का निर्माण अंतिम चरण में है. GDA द्वारा विकसित यह आधुनिक हब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधा बाजार उपलब्ध कराएगा. यहां सिल्क, खादी और पारंपरिक फर्नीचर की 200 से अधिक दुकानें होंगी. इस परियोजना से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा.

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पारंपरिक हस्तशिल्प और बुनकरी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘बुनकर मार्ट’ अब हकीकत बनने जा रहा है. मधुबन बापूधाम में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह आधुनिक कमर्शियल हब अपने अंतिम चरण में है. 75 प्रतिशत काम पूरा होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में यह मार्ट न केवल पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.

अंतिम चरण में 200 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना
जीडीए के अधिकारियों के अनुसार, बुनकर मार्ट का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. निर्माण पूरा होने के बाद यहां पहले चरण में करीब 200 दुकानें शुरू की जाएंगी. इन दुकानों में सिल्क, खादी, कालीन, पीतल के बर्तन, लकड़ी के उत्पाद, पारंपरिक फर्नीचर और अन्य हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुएं बेची जाएंगी. खास बात यह है कि यह मार्ट सिर्फ गाजियाबाद के लिए ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुनकरों और शिल्पकारों के लिए एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बनेगा.

एक छत के नीचे मिलेगा यूपी का ‘हुनर’
इस मार्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कारीगर और बुनकर अपने उत्पाद बिना किसी बिचौलिए के सीधे ग्राहकों को बेच सकेंगे. आमतौर पर कारीगरों को अपनी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता क्योंकि उनके उत्पाद कई हाथों से होकर बाजार तक पहुंचते हैं. लेकिन यहां उन्हें सीधे ग्राहक मिलेंगे जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और ग्राहकों को भी उचित कीमत पर असली हस्तशिल्प उत्पाद मिल सकेंगे.

रोजगार और महिला सशक्तिकरण का नया हब
रोजगार के लिहाज से भी यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है. बुनकर मार्ट शुरू होने के बाद 500 से अधिक लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है. दुकानदारों के अलावा सेल्समैन, कारीगर, पैकिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मचारी और आसपास लगने वाले छोटे फूड स्टॉल संचालकों को भी इससे रोजगार मिलेगा. इस परियोजना में महिला बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों को भी प्राथमिकता देने की योजना बनाई गई है.

प्रशासन का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी पारंपरिक कला को बड़े बाजार तक पहुंचाना है. इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बन सकेंगी.

कारीगरों को मिलेगी अपने हुनर की पहचान
जीडीए सचिव विवेक मिश्रा ने बताया कि बुनकर मार्ट को एक आधुनिक कमर्शियल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. यहां बुनकरों और व्यापारियों के लिए दुकानों के साथ-साथ बड़े मल्टीनेशनल हॉल और मीटिंग हॉल बनाए गए हैं. इसके अलावा यहां मल्टीप्लेक्स और ऑडिटोरियम की सुविधा भी होगी, जहां बड़े कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठकें आयोजित की जा सकेंगी.

मधुबन बापूधाम आवासीय योजना में विकसित हो रहा यह बुनकर मार्ट आने वाले समय में गाजियाबाद का एक बड़ा व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र बन सकता है. इसके शुरू होने से जहां स्थानीय लोगों को एक ही स्थान पर खरीदारी और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. वहीं बुनकरों और कारीगरों को भी अपने हुनर को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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