क्या फ्लैटों से टूट गया मोह? अब प्लॉट में मनमर्जी घर बनाकर रहना चाहते हैं लोग?

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क्या फ्लैटों से टूट गया मोह? अब प्लॉट में मनमर्जी घर बनाकर रहना चाहते हैं लोग?


Plot demand rising: लोगों की पसंद कब बदल जाए कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही अब कुछ रियल एस्टेट मार्केट में देखने को मिल रहा है. जब घरों को लेकर घरवालों यानि खरीदारों की चाहत अब बदल रही है और शहर भी अपनी पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ते हुए तेजी से फैल रहे हैं. लंबे समय तक आवासीय बाजार में हाई-राइज अपार्टमेंट और गेटेड कम्युनिटीज का दबदबा रहा है, लेकिन अब प्लॉटेड डेवलपमेंट्स ने इन सभी को पीछे छोड़ दिया है. अप्रूव्ड प्लॉट यानि योजनाबद्ध तरीके से विकसित प्लॉट घर खरीदने वालों को खूब भा रहे हैं और निवेशकों को भी इसमें फायदा नजर आ रहा है.

प्रॉपइक्विटी की एक रिपोर्ट बताती है कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में पिछले साढ़े 3 साल में 470,000 प्लॉट लांच किए गए हैं. जिनकी कीमत 2.4 लाख करोड़ रुपये के आसपास है. जो बताती है कि भारत में लगातार हाईराइज सोसायटी, डेवलप्ड विला, अपार्टमेंट्स और फ्लैट्स के अलावा इतनी बड़ी संख्या में प्लॉट बेचे-खरीदे गए हैं, जो लोगों की बदलती सोच को बता रहे हैं.

प्लॉटेड डेवलपमेंट्स इतने लोकप्रिय क्यों हो रहे हैं?
भारत में प्लॉटेड डेवलपमेंट्स की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं. इनमें सबसे बड़ा कारण जमीन की कीमतों में होने वाली लगातार बढ़ोतरी है. आम तौर पर तैयार मकानों या पुराने अपार्टमेंट की कीमत समय के साथ कम हो सकती है, लेकिन जमीन की कीमत शहरों के विस्तार और बेहतर होते बुनियादी ढांचे के साथ बढ़ती रहती है.

किफायती होना भी एक बड़ा कारण है. बड़े शहरों में अपार्टमेंट की कीमतें इतनी ज्यादा हो गई हैं कि कई लोगों के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल हो गया है. ऐसे में पहली बार घर खरीदने वाले और निवेशक टियर-2 शहरों या शहरों के बाहरी इलाकों में मिलने वाले प्लॉट्स को बेहतर विकल्प मान रहे हैं, क्योंकि यहां निवेश की शुरुआती लागत अपेक्षाकृत कम होती है.

घर खरीदारों की बदलती पसंद
हाल के वर्षों में घर खरीदने वालों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखा गया है। अब लोग केवल एक सामान्य अपार्टमेंट खरीदने के बजाय ऐसे घर की तलाश में हैं, जहां उन्हें अधिक जगह, बेहतर प्राइवेसी और अपनी पसंद के अनुसार मनमर्जी बदलाव करने की सुविधा मिल सके. प्लॉटेड डेवलपमेंट्स में खरीदारों को यह स्वतंत्रता मिलती है कि वे अपनी जरूरत, जीवनशैली और बजट के अनुसार अपने घर का डिजाइन और निर्माण कर सकते हैं और जब चाहे उसमें फेरबदल भी कर सकते हैं.

बाजार के आंकड़ों में भी इस बदलती मांग का असर साफ दिखाई दे रहा है. खासकर टियर-2 शहरों में प्लॉटेड डेवलपमेंट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. अब कई लोग बड़े महानगरों की भीड़ और शोर-शराबे से दूर, तेजी से विकसित हो रहे छोटे शहरों में निवेश करना और बसना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

द्वारका एक्सप्रेसवे, प्लॉट के लिए उभरता कॉरिडोर
द्वारका एक्सप्रेसवे कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास के लिए तेजी से उभरता हुआ एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है. यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और गुरुग्राम के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान हो गई है और यात्रा का समय भी कम हुआ है. एक्सप्रेसवे के पूरा होने और इसके आसपास तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे के कारण इस पूरे इलाके में रियल एस्टेट गतिविधियों में काफी तेजी आई है. आवासीय परियोजनाओं की बढ़ती मांग और निवेशकों के मजबूत भरोसे के चलते पिछले कुछ वर्षों में यहां संपत्तियों की कीमतों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. बेहतर कनेक्टिविटी, व्यावसायिक विकास और रोजगार केंद्रों के करीब होने के कारण यह क्षेत्र योजनाबद्ध आवासीय परियोजनाओं के लिए काफी उपयुक्त माना जा रहा है. आने वाले समय में जैसे-जैसे यहां नए ऑफिस, शॉपिंग सेंटर और सामाजिक सुविधाएं विकसित होंगी, द्वारका एक्सप्रेसवे आवासीय जमीन में निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा.

डेवलपर्स क्या कहते हैं
मैप्सको ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंगला कहते हैं कि टियर-II शहरों में प्लॉटेड डेवलपमेंट्स का तेजी से बढ़ना यह संकेत देता है कि रियल एस्टेट बाजार अब एक नए और परिपक्व दौर में प्रवेश कर रहा है. आज के समय में लोग जमीन के मालिकाना हक को फिर से सबसे सुरक्षित और लाभदायक निवेश के रूप में देखने लगे हैं. सोनीपत इसका एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया है. दिल्ली-एनसीआर की सीमा के पास होने, हाईवे और एक्सप्रेसवे के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी और तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे के कारण इस शहर में रियल एस्टेट गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं. इसी वजह से सोनीपत अब प्लॉटेड प्रोजेक्ट्स के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है. नई पीढ़ी के घर खरीदार ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां उन्हें सुरक्षा के साथ-साथ लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना भी दिखाई देती है.’

रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर जितेंद्र यादव कहते हैं कि साल 2025 में द्वारका एक्सप्रेसवे के पूरा होने और आईजीआई एयरपोर्ट तक लगभग 3.6 किलोमीटर लंबे टनल बनने से इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो गई है और यात्रा का समय भी कम हुआ है. इससे प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स तक घर खरीदारों की पहुंच आसान हो गई है. इन प्रोजेक्ट्स में खासतौर पर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और बड़े कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स की दिलचस्पी बढ़ी है, जिसके कारण ऐसे प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. एनसीआर के अन्य इलाकों की तुलना में द्वारका एक्सप्रेसवे निवेश के लिए अलग तरह के अवसर प्रदान करता है. यहां विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के बीच स्वतंत्र रूप से रहने का विकल्प मिलता है, जो प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की एक बड़ी खासियत है. इसके साथ ही सरकार द्वारा 24 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण की पहल से इस इलाके में पहले मौजूद कनेक्टिविटी की समस्याएं भी काफी हद तक दूर हो गई हैं. आज के खरीदार ऐसे स्वतंत्र प्लॉट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जहां उन्हें अपने घर का डिजाइन अपनी पसंद के अनुसार तय करने की आजादी, बेहतर प्राइवेसी और भविष्य में अच्छी पूंजी वृद्धि की संभावना मिलती है.’

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन की मानें तो सोनीपत, रोहतक, पानीपत, करनाल और पंचकूला जैसे टियर-II शहरों में प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की बढ़ती संख्या भारत के आवासीय क्षेत्र को नई दिशा दे रही है. प्लॉट में प्राइवेसी, लचीलापन और आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध होता है. इन क्षेत्रों में निवेश करने वाले डेवलपर्स को बेहतर रिटर्न मिल रहा है, वहीं घर खरीदार भी किफायती कीमत और लंबे समय में बढ़ने वाली संपत्ति की वैल्यू के कारण इन शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कम भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने की बढ़ती चाहत भी इस बदलाव को गति दे रही है. जो क्षेत्र पहले ज्यादा चर्चा में नहीं थे, वे अब तेजी से विकसित होकर बेहतर आवासीय समुदायों में बदल रहे हैं. इन उभरते शहरों में घर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और स्थायी संपत्ति बनते जा रहे हैं.’

लिहाजा जैसे-जैसे भारत का रियल एस्टेट बाजार विकसित हो रहा है, निवेशकों और घर खरीदारों के बीच प्लॉटेड डेवलपमेंट्स के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है. जमीन का मालिकाना हक, अपनी पसंद के अनुसार घर बनाने की आजादी, अपेक्षाकृत किफायती कीमत और भविष्य में बेहतर मूल्य वृद्धि की संभावना जैसे कई फायदे इस सेगमेंट को आवासीय बाजार में एक मजबूत विकल्प बना रहे हैं.



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