गोंडा की छात्रा सुनीता वर्मा ने गन्ने के साथ मक्के की सहफसली खेती से बढ़ाई आमदनी,जाने कैसे

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गोंडा की छात्रा सुनीता वर्मा ने गन्ने के साथ मक्के की सहफसली खेती से बढ़ाई आमदनी,जाने कैसे


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गोंडा की छात्रा का कमाल, गन्ने के साथ मक्के की खेती से कमा रही अच्छा मुनाफा

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गोंडा जिले की छात्रा सुनीता वर्मा ने गन्ने के साथ मक्के की सहफसली खेती कर नया उदाहरण पेश किया है. इस तकनीक से एक ही खेत में दो फसलें उगाकर वह कम समय में मक्के से त्वरित आमदनी और बाद में गन्ने से बेहतर मुनाफा कमा रही हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का रास्ता मिल रहा है.

गोंडा. जिला के विकासखंड मुजेहना की एक छात्रा ने खेती में नया प्रयोग कर मिसाल पेश की है. वह गन्ने के साथ मक्के की खेती कर रही है और इससे उसे अच्छा मुनाफा भी हो रहा है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान छात्रा सुनीता वर्मा का कहना है कि एक ही खेत में दो फसलों की खेती करने से जमीन का बेहतर उपयोग होता है और आमदनी भी बढ़ती है. गन्ना लंबी अवधि की फसल है, जबकि मक्का जल्दी तैयार हो जाता है. ऐसे में मक्का बेचकर जल्दी पैसा मिल जाता है और गन्ने से बाद में अच्छी कमाई होती है. सुनीता वर्मा बताती है कि उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की है आगे वह एमएससी में एडमिशन लेने के लिए विचार कर रहे हैं उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ हम खेती किसानी भी कर रहे हैं क्योंकि हमको बचपन से ही खेती किसानी का शौक था और हमारे घर पर खेती किसानी ही होती है. इसलिए हमने थोड़ा लिक से हटकर गन्ने के साथ मक्के की खेती की शुरुआत की.

गन्ने के साथ मक्के की खेती का कहां से आया आइडिया

सुनीता वर्मा बताते हैं कि गन्ने के साथ मक्के की खेती का आईडिया हमको पानी संस्थान द्वारा मिला है. पानी संस्थान में हम भी काम कर रहे हैं और हमारा पद सीआरपी है और हम दूसरों को खेती किसानी के बारे में सलाह देते हैं तो मैंने सोचा कि इस बार हम भी थोड़ा कुछ हटके करें. हम लगभग एक एकड़ में गन्ने के साथ मक्के की खेती कर रहे हैं.

इस खेती को क्या कहते हैं

सुनीता वर्मा बताती है कि यदि एक खेत में एक से अधिक फसल की खेती की जाए तो उसे खेती को सहफसली खेती कहते हैं. इसमें एक ही लागत में दो फसल तैयार हो जाते हैं. जिससे किसान भाइयों को अच्छा लाभ होता है इसीलिए मैं किसान भाइयों से कहना चाहूंगी कि कोई भी फसल करें तो उसके साथ अतिरिक्त फसल जरूर लगाए, जिससे उनकी पॉकेट मनी निकलते रहे. सुनीता वर्मा बताते हैं कि गन्ने और मक्के की बुवाई जनवरी में कर दी थी, उन्होंने बताया कि जब तक गन्ने की फसल बड़ी होती है उसके पहले ही मक्के की कटाई हो जाती है इससे किसान भाइयों को जो मक्के से लाभ होता है वह पूरा लागत रहता है और पॉकेट मनी होता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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