3 महीने में तैयार, सालभर देगी फायदा! इस खाद ने बढ़ाई किसानों कमाई, जानिए बनाने का तरीका
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How to Make Compost at Home: लखीमपुर खीरी के किसान अब रासायनिक खादों का पीछा छोड़ नाडेप कंपोस्ट के जरिए अपनी किस्मत बदल रहे हैं. कम लागत और बिना किसी तामझाम के तैयार होने वाली यह खाद न केवल गन्ने की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि इससे गांवों में फैली गंदगी भी अब खाद के खजाने में तब्दील हो रही है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक यूरिया की किल्लत झेल रहे किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा है. जानिए कैसे कूड़े-कचरे और थोड़े से गोबर से आप घर बैठे सबसे ताकतवर जैविक खाद बनाकर अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला गन्ने की मिठास के लिए जाना जाता है. जिले में करीब 7 लाख से ज्यादा लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं, जिनमें से 3 लाख से अधिक किसान पूरी तरह गन्ने की फसल पर निर्भर हैं. अब तक बेहतर पैदावार के लिए किसान बाजार से मिलने वाली महंगी रासायनिक खादों पर निर्भर थे, लेकिन अब हवा बदल रही है. खीरी के किसान अब रासायनिक उर्वरकों से किनारा कर जैविक खाद की ओर बढ़ रहे हैं. कृषि विभाग और प्रदेश सरकार की इस पहल ने न केवल फसलों की सेहत सुधारी है, बल्कि गांवों की सूरत भी बदल दी है.
गांवों में गंदगी हुई कम और खेतों को मिला अमृत
सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों में ‘नाडेप खाद’ बनाने के लिए विशेष टैंक बनवाए जा रहे हैं. इससे एक तीर से दो निशाने सध रहे हैं. पहला यह कि पहले जो कूड़ा-कचरा सड़कों पर बिखरा रहता था, अब उसे इकट्ठा करके इन गड्ढों में डाला जाता है. दूसरा यह कि जिनके पास पशु हैं, वे गोबर को इधर-उधर फेंकने के बजाय इसी टैंक में डालते हैं. इससे गांव में सफाई भी रहती है और पर्यावरण भी साफ-सुथरा बना रहता है. सबसे बड़ी बात यह है कि किसान बहुत ही आसानी से और बिना किसी बड़े खर्च के अपने गांव में ही यह कीमती जैविक खाद तैयार कर रहे हैं.
इन चीजों से तैयार होता है जैविक खजाना
नाडेप कंपोस्ट बनाने के लिए किसी खास जगह की नहीं, बस एक छायादार स्थान की जरूरत होती है. इसे बनाने के लिए आप पशुओं का गोबर, सब्जियों के छिलके, खेतों का खरपतवार और खराब हो चुका भूसा इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें बहुत कम गोबर की जरूरत पड़ती है और खाद ज्यादा मात्रा में तैयार होती है. खाद की क्वालिटी को और बेहतर बनाने के लिए आप इसमें गोमूत्र का उपयोग भी कर सकते हैं. एक खास बात का ध्यान रखना जरूरी है कि खाद में दीमक न लगे, इसके लिए नीम के तेल का छिड़काव करना बहुत फायदेमंद रहता है.
90 से 120 दिनों में खाद हो जाएगी तैयार
यह खाद तैयार होने में लगभग 90 से 120 दिन का समय लेती है. खाद की नमी को बनाए रखने के लिए हर 15 से 20 दिन में इस पर पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए. जब यह खाद बनकर तैयार होती है, तो इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो फसलों के लिए किसी टॉनिक की तरह काम करते हैं. यह यूरिया और डीएपी की तुलना में मिट्टी को ज्यादा उपजाऊ बनाती है और जमीन की ताकत को लंबे समय तक बरकरार रखती है.
यूरिया की टेंशन खत्म और कमाई का नया मौका
अक्सर देखा जाता है कि सीजन के समय यूरिया न मिलने से किसान भाई बहुत परेशान रहते हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नाडेप खाद इस समस्या का सबसे सटीक समाधान है. इसमें 1.5% तक नाइट्रोजन और पर्याप्त पोटाश होता है जो गन्ने और अन्य फसलों के लिए बहुत लाभकारी है. किसान इसे न केवल अपने खेतों में डाल सकते हैं, बल्कि इसे बनाकर बाजार में बेच भी सकते हैं. पौधों और फसलों के लिए इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए यह कमाई का एक शानदार जरिया भी बन सकता है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें