नए एक्सप्रेसवे के बीच डाटकाली मंदिर की बढ़ी महत्ता, जानिए क्या है खास?

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नए एक्सप्रेसवे के बीच डाटकाली मंदिर की बढ़ी महत्ता, जानिए क्या है खास?


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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लेकर देशभर में चर्चा तेज है. 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करेंगे और पहली बार डाटकाली मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचेंगे. खास बात यह है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस प्राचीन मंदिर की आस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे यह प्रोजेक्ट विकास के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी समेटे हुए है.

प्रधानमंत्री एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने के बाद पहली बार मां डांटकाली मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचेंगे. इससे इस धार्मिक स्थल की महत्ता और बढ़ेगी, साथ ही इसे पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलेगी. दिल्ली और उत्तराखंड को जोड़ने वाला यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आस्था और विकास का संगम भी बन गया है.

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. 14 अप्रैल 2026 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की भी संभावना है. उद्घाटन के बाद एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा.

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दिल्ली और उत्तराखंड को जोड़ने वाला यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आस्था और विकास का संगम बन गया है. खास बात यह है कि इसके निर्माण में डाट काली मंदिर की धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा गया है, जहां कई राज्यों से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.

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मंदिर के पास से गुजरने वाले मार्ग पर एक विशेष ओवरब्रिज (फ्लाईओवर) बनाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही बाधित न हो और मंदिर की पवित्रता बनी रहे. सहारनपुर से आने वाले श्रद्धालु सीधे फ्लाईओवर के जरिए मां डांटकाली मंदिर पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं, वहीं देहरादून की ओर से आने वालों के लिए भी अलग मार्ग की व्यवस्था की गई है.

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डाटकाली मंदिर, जिसे डाटकाली सिद्धपीठ भी कहा जाता है, देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है. मान्यता है कि यहां माता काली की पूजा करने और नए वाहन का पूजन कराने से यात्रा सुरक्षित होती है. वर्षों से यहां से गुजरने वाले यात्री और चालक मंदिर में रुककर दर्शन करते हैं और आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद लेते हैं. नवरात्र और अन्य पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान डाटकाली मंदिर की विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरिंग स्तर पर बदलाव किए गए. मंदिर के पास ट्रैफिक को सुचारू रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग से ओवरब्रिज और सर्विस लेन बनाई गई है. इससे एक ओर हाईवे पर वाहनों की रफ्तार बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां आगमन इस मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने यहां आकर दर्शन नहीं किए थे. ऐसे में यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से अहम है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई पहचान देने वाला माना जा रहा है.

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हिंदू धर्म से जुड़े लोगों की मान्यता है कि जब भी वे नया वाहन खरीदते हैं, तो इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद ही अपना सफर शुरू करते हैं. इसी वजह से माता को यात्रा की देवी भी कहा जाता है. सहारनपुर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों से आने वाले लोग यहां दर्शन किए बिना आगे नहीं बढ़ते, जिससे यह स्थान आज आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.



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