कागजों में बने घर, जमीनी हकीकत में बेघर लोग! अमेठी में आवास योजना पर उठे सवाल

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कागजों में बने घर, जमीनी हकीकत में बेघर लोग! अमेठी में आवास योजना पर उठे सवाल


अमेठी: सरकार लोगों के लिए तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित करती है. उसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास भी शामिल है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मिलता है. लेकिन अमेठी जिले में हाल कुछ ऐसा है कि कई गांव में लाभार्थी पात्र होने के बावजूद भी इस योजना से अब तक वंचित हैं. यह हम नहीं, बल्कि उनका आरोप कह रहा है. लाभार्थियों का आरोप है कि कई बार उन्होंने विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समस्या के निस्तारण के बदले उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है और उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया गया.

लोकल 18 ने कई गांव में ग्राउंड रिपोर्ट की, जिसमें सुजानपुर, सैठा, सारीपुर जैसे दर्जनों गांव में सैकडों से अधिक लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें कई बार की शिकायत की बावजूद भी आवास योजना से अब तक लाभ नहीं मिल पाया. कुछ लाभार्थी तो ऐसे भी हैं, जिन्हें ना तो आवास योजना का लाभ मिला, ना ही सरकार की अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं का. उन्होंने आरोप लगाया कि ना तो प्रधान उनकी सुनते हैं, ना विधायक, ना उन्हें घर मिलता है, ना योजना का लाभ मिल पा रहा है. अब वो योजना का लाभ लेने के लिए किसके पास जाएं.

अब कैसे मिलेगा योजना का लाभ?
अमेठी जिले के गौरीगंज की रहने वाली सुजानपुर निवासी कमरे निशा बताती हैं कि वह दिव्यांग हैं. इसके साथ ही उनके पति का भी देहांत हो गया है. उसके बाद भी उन्होंने आवास के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें ना तो प्रधान की तरफ से कोई लाभ मिला, ना ही अधिकारियों की तरफ से कोई जानकारी. उन्होंने कहा कि इतनी सक्षम भी नहीं हैं कि चलकर जाएं और अपना हक मांग सकें. अब सरकार का ही भरोसा है. जब मिल जाएगा, तो बेहतर है. उन्होंने अपना घर भी दिखाया और कहा कि इसी कच्चे मकान में रहती हैं, जहां बरसात में भी काफी समस्या होती है.

वहीं सारीपुर की निवासी महिला सुशीला देवी बताती हैं कि उन्हे गांव में तो किसी योजना का लाभ नहीं मिला. कई बार उन्होंने आवास के लिए मांग की, शिकायती पत्र दिया कि वह पात्र हैं, लेकिन उसके बाद भी उन्हें आवास नहीं मिला. उन्होंने कहा कि योजना का लाभ मिल जाए, तो बेहतर है, नहीं तो जीवन यापन तो चल ही रहा है.

सिर्फ आश्वासन, कोई लाभ नहीं
एक और पात्र महिला और सैठा गांव निवासी बताती हैं कि ना कॉलोनी मिली है, ना पेंशन मिल रही है, ना राशन मिलता है. अब जाए तो कहां जाएं. उन्होंने कहा कि कई बार प्रधान से भी शिकायत की गई. हम ब्लॉक भी गए, लेकिन सिर्फ हर बार आश्वासन मिलता है कि आपका काम हो जाएगा और योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन सिर्फ कागजों तक ही सारी व्यवस्था है और लाभ नहीं मिलता है. हमारी मांग है कि इसकी निष्पक्ष जांच हो और कम से कम पात्र लोगों को तो लाभ मिले.

पूरी समस्या को लेकर विभागीय अधिकारी और परियोजना निदेशक ऐश्वर्य यादव ने कैमरे पर बोलने से इनकार कर दिया. उन्होंने फोन पर बातचीत में कहा कि इस पूरे वित्तीय वर्ष में 82000 से अधिक लोगों को आवास दिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जहां पर भी शिकायत आएगी, उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पात्र व्यक्ति को वंचित रखने के बजाय उसे लाभ दिया जाएगा. कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित नहीं होगा.



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