आजमगढ़ की ‘ब्लैक पॉटरी’ से चमक सकती है आपकी किस्मत, शुरू करें अपना बिजनेस
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Black Pottery Azamgarh: आजमगढ़ की विश्व प्रसिद्ध ‘ब्लैक पॉटरी’ अब युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया बन रही है. उत्तर प्रदेश सरकार की ODOP योजना और माटी कला बोर्ड के तहत इस उद्योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है. नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 35% तक की सब्सिडी, फ्री टूलकिट और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रही है. अगर आप भी कम निवेश में तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सरकार की आर्थिक सहायता का लाभ उठाकर ब्लैक पॉटरी बिजनेस शुरू करें और आत्मनिर्भर बनें.
आजमगढ़: अगर आप अपनी मेहनत और हुनर के दम पर खुद का साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं और स्वरोजगार की तलाश में हैं, तो आजमगढ़ की ऐतिहासिक ‘ब्लैक पॉटरी’ (काली मिट्टी के बर्तन) आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. यह सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं, बल्कि आजमगढ़ की वैश्विक पहचान है. उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना ने इस पारंपरिक कला को अब एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया है. युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार न केवल भारी सब्सिडी दे रही है, बल्कि बाजार से लेकर ट्रेनिंग तक हर कदम पर साथ खड़ी है.
विश्व पटल पर आजमगढ़ की पहचान: ब्लैक पॉटरी
सबसे खास बात यह है कि आजमगढ़ के निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी की डिमांड सिर्फ स्थानीय बाजारों या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है. इसकी अनूठी चमक और कारीगरी का जादू देश के विभिन्न राज्यों समेत सात समंदर पार भी सिर चढ़कर बोल रहा है. सरकार के पास उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से यहां तैयार होने वाले मिट्टी के बर्तनों को विदेशों में बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट किया जा रहा है. व्यावसायिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्लैक पॉटरी उद्योग आज के दौर में युवाओं के लिए रोजगार का एक जबरदस्त और टिकाऊ साधन बन चुका है, जिससे जुड़कर वे मोटा मुनाफा कमा सकते हैं.
माटी कला बोर्ड की पहल: फ्री टूलकिट और सहायता
प्रदेश सरकार के द्वारा माटी कला बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक तौर पर मिट्टी के बर्तनों का व्यापार करने वाले लोगों को तो प्रोत्साहित किया ही जाता है. इसके अलावा नए युवा जो इस व्यवसाय से जोड़ने के इच्छुक है उन्हें भी प्रोत्साहित करने के लिए ट्रेनिंग के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराती है. ग्राम उद्योग अधिकारी आजमगढ़ दीपक मिश्रा बताते हैं कि माटी कला बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक तौर पर मिट्टी के बर्तनों का उत्पादन करने वाले लोगों को सरकार की तरफ से विशेष टूलकिट उपलब्ध कराया जाता है, जो बिल्कुल नि:शुल्क होता है. इसके अलावा उन्हें आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है. ताकि वह इस व्यवसाय को और बेहतर तरीके से संचालित कर सके.
युवाओं के लिए खास: 35% सब्सिडी और लोन की सुविधा
इस व्यवसाय की सबसे आकर्षक बात यह है कि सरकार अब नए उद्यमियों और युवाओं को भी इससे जोड़ने के लिए विशेष प्रयास कर रही है. यदि कोई युवा इस क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, तो उसे सरकार की ओर से व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है. साथ ही, व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिस पर 35% तक की सब्सिडी का प्रावधान है. यह वित्तीय मदद युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
मार्केटिंग और भविष्य की राह
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि उत्पादों को बेचने के लिए सरकार उद्यमियों को बाजार भी उपलब्ध करा रही है. मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफार्म्स के माध्यम से इन उत्पादों की पहुंच बढ़ाई जा रही है. ऐसे में माटी कला उद्योग से जुड़कर युवा न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त कर सकते हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देकर समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें