राधा ने कृष्ण के लिए बनाया था मथुरा का ये कुंड, जानें इसके जल से क्यों से कतरा रहे लोग

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राधा ने कृष्ण के लिए बनाया था मथुरा का ये कुंड, जानें इसके जल से क्यों से कतरा रहे लोग


Agency:News18 Uttar Pradesh

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Radha Shyam Kund Mathura Pollution : तीन एकड़ में फैले इन कुंडों के जल के ऊपर मोटी काई जम चुकी है, जिससे इसका स्वरूप बिगड़ा गया है. इसके आसपास बने आश्रमों की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में कई खतरनाक चीजें सामने आई…और पढ़ें

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जलाशयों में भर जल प्रदूषित हो चुका है.

हाइलाइट्स

  • राधा श्याम कुंड का जल प्रदूषित हो चुका है.
  • कुंड के जल से भीषण दुर्गंध आती है.
  • टाटा समूह इस कुंड की कराएगा सफाई.

मथुरा. यूपी के मथुरा के गिरिराज परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले कुंड और जलाशयों की अनदेखी के घातक प्रणाम सामने आने लगे हैं. इन जलाशयों में जल घातक रूप से प्रदूषित हो चुका है. गिरिराज परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले राधा श्याम कुंड करीब 3 एकड़ में फैए हुए हैं. इन कुंडों के जल के ऊपर मोटी काई जम चुकी है, जिससे कुंडों का स्वरूप बिगड़ा गया है. स्थिति ऐसी है कि यहां रोजाना आने वाले हजारों की संख्या में भक्त राधा श्याम कुंड में स्नान तो छोड़िए इसके जल से आचमन करने से कतरा रहे हैं.

जल से दुर्गंध

आईएएस ईओ रिंकू सिंह राही की ओर से राधा श्याम कुंड के आसपास बने आश्रमों, घरों और मंदिरों के निरीक्षण में कई खतरनाक नतीजे सामने आए हैं. इनमें बने मल-मूत्र के टैंक सोखता के पाए गए, जिसका सीधा असर राधा श्याम कुंड के जल पर हो रहा है. इस कारण जल से दुर्गंध उठ रही है. ऐसे में सभी आश्रम संचालकों को नोटिस दिए गए हैं. उधर, पूर्व में उत्तर प्रदेश ब्रज विकास तीर्थ परिषद ने जेएस वाटर एनर्जी लाइफ प्राइवेट लिमिटेड गुरुग्राम की ओर से राधा श्याम कुंड में बैक्टीरिया डलवाया था. कंपनी की ओर से ऐसा तीन-चार बार ऐसा किया गया, लेकिन असफलता ही हाथ लगी और जल में ऑक्सीजन नहीं पैदा हो सकी.

टाटा ने बढ़ाए हाथ

कहा जा रहा है कि इस कुंड के जल से ऑक्सीजन समाप्त होने का मुख्य कारण आश्रमों में बने मल-मूत्र के सोखता टैंक हो सकते हैं. बहुत से टैंक तो मंदिरों में स्थापित कुएं में ही बना दिए गए हैं, जिनका स्त्रोत सीधा राधा श्याम कुंड में जाता है. नगर पंचायत अध्यक्ष रामफल बताते हैं कि जुलाई और अगस्त माह में टाटा समूह की ओर से राधा श्याम कुंड की साफ-सफाई और पुनः निर्माण कराया जाएगा.

धार्मिक महत्त्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण अपने मामा कंस की ओर से भेजे गए राक्षस अरिष्ट को मारने के बाद राधा से मिलने गए, तो उन्होंने मजाक में उनके साथ खेलने से मना कर दिया. उन्होंने कृष्ण को हर पवित्र स्थान पर स्नान करने के बाद ही अपने शुद्ध शरीर को छूने के लिए कहा. भगवान कृष्ण ने उसी क्षण वहीं जमीन पर एड़ी मारकर एक कुंड बना दिया और सभी पवित्र स्थानों के पानी को कुंड में प्रवेश करने के लिए बुलाया. कृष्ण ने इसमें स्नान कर राधा रानी को चिढ़ाया कि वो तालाब बनाने में कितने सिद्धहस्त हैं. राधा रानी भी उनके लिए एक तालाब खोदना चाहती थीं. उन्होंने अपने कंगन से ऐसा किया. लेकिन जब कुंड में जल की एक बूंद भी प्रकट नहीं हुई तो श्री कृष्ण ने सभी तीर्थों को पुन: जल रूप में श्री राधा रानी के कुंड में प्रवेश करने का संकेत दिया. कहा जाता है कि ये कुंड वही हैं.

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