झुलसाने वाली गर्मी में क्यों सूख रहे हैं बैंगन? जानें बंपर पैदावार के अचूक उपाय
Last Updated:
Brinjal Protection Tips: मई-जून की भीषण गर्मी और चलती तेज लू के कारण बैंगन की खेती करने वाले किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. इस मौसम में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाते ही बैंगन के फल और फूल सूखकर गिरने लगते है. जिससे उत्पादन आधा रह जाता है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि सही समय पर नमी प्रबंधन और वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर इस समस्या से निजात पाई जा सकती है.
प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि मई और जून के महीनों में चलने वाली गर्म हवाएं यानी लू और बढ़ता तापमान बैंगन की फसल के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. जब पारा बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो पौधों में वाष्पोत्सर्जन (transpiration) तेजी से होता है. इस वजह से पौधों की जड़ें उतनी तेजी से पानी अवशोषित नहीं कर पातीं, जितनी तेजी से पत्तियां पानी छोड़ती हैं. नतीजा यह होता है कि नमी की कमी के कारण छोटे फल और कोमल फूल सूखकर झड़ने लगते हैं.

इस समस्या से बचने के लिए किसानों को अपने खेतों में ‘मल्चिंग’ (Mulching) जरूर करनी चाहिए. बैंगन के पौधों के चारों तरफ प्लास्टिक मल्च या सूखी घास-फूस की परत बिछाने से मिट्टी की नमी धूप में उड़ती नहीं है. इससे जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है, जड़ों को ठंडक मिलती है और पानी की बचत होती है. मल्चिंग करने से फल सीधे गर्म मिट्टी के संपर्क में आकर सूखते भी नहीं हैं.

इस मौसम में जमीन बहुत जल्दी सूख जाती है. अगर सिंचाई में थोड़ी भी देरी हो या पानी की मात्रा अनियमित हो, तो बैंगन के पौधों पर इसका सीधा असर पड़ता है. मिट्टी में नमी का स्तर अचानक घटने-बढ़ने से पौधों में तनाव (stress) पैदा होता है. उचित नमी न मिलने के कारण फल अंदर से कड़े होने लगते हैं, उनका विकास रुक जाता है और सूखकर काले या पीले पड़ जाते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

अधिक पैदावार लेने के लिए खेत के चारों तरफ ऊंची फसलें जैसे मक्का या बाजरा की दो लाइनें लगाएं, जो प्राकृतिक ‘विंड ब्रेकर’ (Wind Breaker) का काम करेंगी और गर्म लू को रोकेंगी. इसके अलावा, पौधों पर 50% वाले ग्रीन शेड नेट का प्रयोग करके भी तेज धूप से बचाया जा सकता है. इन सभी वैज्ञानिक उपायों को एक साथ अपनाकर किसान गर्मी में भी बैंगन का रिकॉर्ड और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन ले सकते हैं.

मई-जून की गर्मी में सिंचाई दोपहर के समय भूलकर भी न करें. हमेशा सुबह के वक्त या देर शाम को ही खेतों में पानी दें, जब तापमान थोड़ा कम हो. आगे संभव हो, तो टपक सिंचाई (Drip Irrigation) करें. ड्रिप सिस्टम से पौधों की जड़ों को लगातार बूंद-बूंद पानी मिलता रहता है, जिससे मिट्टी में नमी का स्तर हमेशा एक समान बना रहता है और फल सूखने की समस्या 80% तक कम हो जाती है.

गर्मी के मौसम में बैंगन की फसल पर ‘तना और फल छेदक’ (Shoot and Fruit Borer) कीट का प्रकोप चरम पर होता है. इस कीट की सुंडी फल के भीतर घुसकर उसे अंदर ही अंदर खा जाती है और अपने मल से भर देती है. प्रभावित फल में पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है, जिससे फल पूरी तरह विकसित होने से पहले ही सूख जाता है और बाजार में बेचने लायक नहीं रहता है.

गर्मी के तनाव से निपटने के लिए पौधों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है. इस समय नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देनी चाहिए, क्योंकि इससे कोमल पत्तियां ज्यादा निकलती हैं जो जल्दी मुरझाती हैं. इसके बजाय पोटेशियम और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें. बोरॉन के छिड़काव से फल और फूल मजबूत होते हैं, उनका गिरना बंद होता है और फलों की चमक व गुणवत्ता में भारी सुधार होता है.

फल छेदक कीट से बचाव के लिए खेतों में प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं. शुरुआत में नीम के तेल (Neem Oil) का नियमित छिड़काव करें. अगर प्रकोप ज्यादा बढ़ गया हो, तो कृषि एक्सपर्ट की सलाह पर उचित कीटनाशक जैसे स्पिनोसैड या कोराजन का छिड़काव शाम के समय करें. ग्रसित फलों और टहनियों को तोड़कर खेत से दूर जमीन में गहरा दबा दें ताकि संक्रमण आगे न फैले.