मई-जून की गर्म हवाओं से बचाएं अपनी लीची, इन टिप्स से दूर होगी फ्रूट क्रैकिंग की समस्या
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Litchi Fruit Cracking: लीची किसानों के लिए ‘फ्रूट क्रैकिंग’ यानी फलों का फटना एक बड़ी चुनौती है. लीची के फलों को फटने से बचाने के लिए बागों में उचित नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है. जब फल पूरी तरह सेट हो जाएं, तो सिंचाई का विशेष ध्यान रखें. किसान मिट्टी की जांच कर लें, अगर हाथ में उठाने पर मिट्टी का गोला बन जाता है, तो नमी पर्याप्त है. खेतों में अत्यधिक पानी भरने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे भी फल फटने की दर बढ़ जाती है.
शाहजहांपुर: लीची की खेती किसानों के लिए एक बेहद मुनाफे का सौदा मानी जाती है. अपनी अनूठी मिठास और रसीले स्वाद के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. जिससे किसानों को कम समय में बेहतर आमदनी मिलती है. हालांकि, इस मुनाफे के साथ ही लीची उत्पादक किसानों को कई बड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है. इनमें सबसे प्रमुख समस्या है ‘फ्रूट क्रैकिंग’ यानी लीची के फलों का फटना. तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव, गर्म हवाएं और नमी की कमी के कारण फल पकने से पहले ही फटने लगते हैं, जिससे फल की गुणवत्ता खराब हो जाती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि लीची में फलों का फटना एक गंभीर समस्या है, जो पूरी फसल को प्रभावित कर सकती है. यह मूल रूप से एक ‘फिजियोलॉजिकल डिसऑर्डर’ है. इससे बचाव के लिए फल आते समय खेत में नमी का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसके लिए मिट्टी की फील्ड कैपेसिटी के अनुसार नियमित रूप से सिंचाई करना जरूरी है. इसके अलावा, इस समस्या के समाधान के लिए 0.4 ग्राम प्रति लीटर की दर से बोरेक्स का घोल बनाकर 10-10 दिनों के अंतराल पर फसल पर छिड़काव करें, जिससे फल फटने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
नमी प्रबंधन का महत्व
लीची के फलों को फटने से बचाने के लिए बागों में उचित नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है. जब फल पूरी तरह सेट हो जाएं, तो सिंचाई का विशेष ध्यान रखें. किसान मिट्टी की जांच कर लें, अगर हाथ में उठाने पर मिट्टी का गोला बन जाता है, तो नमी पर्याप्त है. खेतों में अत्यधिक पानी भरने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे भी फल फटने की दर बढ़ जाती है.
बोरेक्स का वैज्ञानिक छिड़काव
फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें फटने से रोकने के लिए पोषक तत्वों का छिड़काव बेहद कारगर साबित होता है. इसके लिए प्रति लीटर पानी में 0.4 ग्राम बोरेक्स मिलाकर घोल तैयार करें. इस तैयार घोल का लीची के पेड़ों पर हर 10 दिनों के अंतराल पर नियमित रूप से छिड़काव करने से ‘फ्रूट क्रैकिंग’ की समस्या से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है.
तापमान और गर्म हवाओं से बचाव
मई और जून के महीनों में चलने वाली तेज धूप और गर्म हवाएं लीची की त्वचा को सुखा देती हैं, जिससे अंदरूनी दबाव बढ़ने पर फल फट जाते हैं. इस प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए बागों के चारों तरफ हवा रोधक ऊंचे पेड़ यानी विंड ब्रेक्स लगाना फायदेमंद रहता है. इसके साथ ही, सुबह या शाम के ठंडे समय में हल्की सिंचाई करने से बाग का तापमान नियंत्रित रहता है.
किसानों के लिए आर्थिक लाभ
अगर किसान वैज्ञानिक तरीकों और उद्यान विभाग की सलाह के अनुसार समय पर उचित प्रबंधन करते हैं, तो वो अपनी लीची की फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं. फल फटने की समस्या पर नियंत्रण पाकर न केवल पैदावार में बढ़ोतरी होगी, बल्कि बाजार में भी फलों के अच्छे दाम मिलेंगे. सही देखरेख और उचित तकनीकी ज्ञान अपनाकर लीची की खेती से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें