वास्तु से लेकर सजावट तक…मुरादाबाद का ये सूर्य कछुआ बना लोगों की पहली पसंद

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वास्तु से लेकर सजावट तक…मुरादाबाद का ये सूर्य कछुआ बना लोगों की पहली पसंद


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Moradabad Brass Industry: उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर अपनी पीतल की नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इन दिनों यहां के शिल्पकारों ने एक बेहद अनोखा पीतल का कछुआ तैयार किया है, जिसकी पीठ पर भगवान सूर्य देव की सुंदर आकृति उकेरी गई है. इस एंटीक मूर्ति की मांग भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रहने वाले सनातनी परिवारों के बीच खूब हो रही है. जानिए इस कछुए की क्या खासियत है, इसके अलग-अलग साइज और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे घर में रखने के क्या बड़े फायदे हैं.

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद को पूरी दुनिया ‘पीतल नगरी’ के नाम से जानती है. यहां के बने पीतल के उत्पाद न सिर्फ देश में पसंद किए जाते हैं, बल्कि विदेशों में भी बड़े स्तर पर एक्सपोर्ट होते हैं. मुरादाबाद के इस हुनर को दुनिया भर में चमकाने का श्रेय यहां के शिल्पगुरुओं को जाता है, जो अपनी बारीक और सुंदर नक्काशी से आम पीतल को भी बेहद खूबसूरत रूप दे देते हैं. इसी कड़ी में इन दिनों पीतल नगरी में एक बेहद अनोखा और खास कछुआ तैयार किया जा रहा है, जो अपनी खास बनावट की वजह से हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है.
इस कछुए की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिल्पकारों ने इसकी पीठ पर बहुत ही बारीक नक्काशी करके सूर्य देव की तस्वीर को उकेरा है. अपनी इसी अनोखी और एंटीक बनावट की वजह से इस मूर्ति की डिमांड बाजार में बहुत ज्यादा बढ़ गई है. भारत के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले सनातनी लोग भी इस अनोखे कछुए को खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

3 इंच से लेकर 14 इंच तक के साइज में उपलब्ध
मुरादाबाद के पीतल कारोबारी राघव खन्ना ने बताया कि उनके यहां इस कछुए को बहुत ही बारीक कारीगरी के साथ तैयार किया जा रहा है. यह आम कछुओं की मूर्तियों से बिल्कुल अलग और एंटीक पीस है. ग्राहकों की पसंद और जरूरत को देखते हुए इसे 3 इंच से लेकर 14 इंच तक के अलग-अलग साइज में बनाया जा रहा है. दिखने में यह कछुआ इतना आकर्षक और सुंदर लगता है कि लोग पहली नजर में इसे पसंद कर रहे हैं. मुरादाबाद मंडल के अलावा पूरे भारत, खासकर नॉर्थ इंडिया और साउथ साइड से इसके थोक ऑर्डर मिल रहे हैं.

भगवान विष्णु का अवतार और कीमत
हिंदू धर्म में कछुए का बहुत गहरा धार्मिक महत्व है. इसे भगवान विष्णु के ‘कच्छप अवतार’ यानी कूर्म अवतार के रूप में पूजा जाता है. यही वजह है कि सनातन धर्म को मानने वाले लोग इसे अपने घरों में रखना बेहद पवित्र मानते हैं. कीमत की बात करें तो इस अनोखे कछुए की शुरुआती कीमत 300 रुपये से लेकर साइज और वजन के हिसाब से हजारों रुपये तक जाती है. इसके अलावा, अगर कोई ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से कछुआ बनवाना चाहता है, तो ऑर्डर देकर भी इसे तैयार कराया जा सकता है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखना बेहद शुभ
प्रसिद्ध पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि वास्तु शास्त्र और हिंदू मान्यताओं में कछुए को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है. ऐसा माना जाता है कि घर या कार्यस्थल पर कछुए की मूर्ति रखने से धन की कमी नहीं होती, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों की उम्र लंबी होती है. वास्तु के नियमों के अनुसार, कछुए की मूर्ति को हमेशा घर की उत्तर दिशा में रखना चाहिए. उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है, इसलिए इस दिशा में कछुआ रखने से घर में बरकत आती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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