बच्चे बना रहे तरह-तरह के प्रोजेक्ट
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अमेठी जिले के प्राथमिक विद्यालय घाटकोर की छात्रा रुचि ने स्मार्टहोम तैयार किया है. जो घर में एलपीजी लीकेज के होते ही अलार्म का संकेत देगा और बड़ी दुर्घटना को नही होनें देगा. सुरक्षित करेगा इसी तरीके से अमेठी जिले के एक छात्र ने ब्लाइंड स्ट्रिक्ट तैयार किया है. जो दिव्यांगों के काम आएगी कहीं पर भी दिव्यांग जा रहे हैं. वह स्टिक उनके हाथ में आते ही 10 से 15 मीटर दूर कोई अनहोनी कोई गड्ढा या फिर अन्य समस्या की होती.
अमेठी: सरकारी विद्यालय में अक्सर सुविधाओं का अभाव देखा जाता है, लेकिन अगर वही सरकारी विद्यालय के बच्चे हुंअरबाज और अकलमंद होते जाएं. यह आंकड़े कहीं ना कहीं आश्चर्यचकित करेंगे कुछ ऐसा ही कहानी है. अमेठी की सरकारी विद्यालय के अलग-अलग बच्चों की जहां पर बच्चे यूनिक प्रोजेक्ट बनाकर अपने हुनर और अपनी बुद्धिमता की पारदर्शिता को और मजबूत कर रहे हैं. छोटे से छोटे और बड़े से बड़े प्रोजेक्ट जो आम जनमानस के साथ अन्य लोगों के काम आ सके उन्हें बच्चों द्वारा तैयार किया जा रहा है.
ब्लाइंड स्टिक से लेकर स्मार्ट होम तक अलग-अलग प्रोजेक्ट
अमेठी जिले के प्राथमिक विद्यालय घाटकोर की छात्रा रुचि ने स्मार्टहोम तैयार किया है. जो घर में एलपीजी लीकेज के होते ही अलार्म का संकेत देगा और बड़ी दुर्घटना को नही होनें देगा. सुरक्षित करेगा इसी तरीके से अमेठी जिले के एक छात्र ने ब्लाइंड स्ट्रिक्ट तैयार किया है. जो दिव्यांगों के काम आएगी कहीं पर भी दिव्यांग जा रहे हैं. वह स्टिक उनके हाथ में आते ही 10 से 15 मीटर दूर कोई अनहोनी कोई गड्ढा या फिर अन्य समस्या की होती. उन्हें तुरंत संकेत करेगी और उन्हें सुरक्षित करेगी इसी तरीके से वेस्ट मटेरियल का भी इस्तेमाल प्रोजेक्ट बनाने में किया गया है. अलग-अलग बड़े पर्यटन स्थल जैसे केदारनाथ राम मंदिर जैसे यूनिक प्रोजेक्ट भी बच्चे तैयार कर रहे हैं. जिन्हें मंडल स्तर पर प्रदेश स्तर पर भेजा जा चुका है और बच्चों को सम्मानित भी किया जा रहा है.
समय-समय पर अधिकारी दे रहे निर्देश
आपको बता दें कि प्रोजेक्ट डिपार्टमेंट के प्रमुख मंसाराम मौर्य बताते हैं कि बच्चों को समय-समय पर अधिकारियों के निर्देश पर किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रोजेक्ट बनाना भी सिखाया जाता है. वेस्ट मटेरियल से तैयार होने वाले प्रोजेक्ट से दो फायदे हैं एक तो उसका सदुपयोग हो जाता है. दूसरा हम जब उपयोगी प्रोजेक्ट बच्चों द्वारा तैयार करते हैं तो उसके जरिए बच्चों की बुद्धिमत्ता उनके शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है. उन्होंने कहा कि अब तक बच्चे कई ऐसे प्रोजेक्ट बना चुके हैं. जो आम जन को सीधा फायदा दे रहे हैं और इन प्रोजेक्ट को मंडल स्तर और प्रदेश स्तर पर भी भेजा जा चुका है. इससे बच्चों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है इसके साथ ही उन्हें आगे भी प्रोजेक्ट बनाने में एक हौसला मिलेगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें