गोंडा में नाशपाती उगा रहे सुशील, लोग कहते थे- ये यहां हो ही नहीं सकता, जानिए कैसे उगाया?
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Pear Farming : गोंडा के इस किसान ने कुछ ऐसा किया, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है. लोकल 18 से किसान सुशील बताते हैं कि पहले वह पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. आमदनी सीमित थी. इसी दौरान उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया. जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने नाशपाती की खेती शुरू की. सुशील के मुताबिक, शुरुआत में लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं था कि गोंडा जैसे क्षेत्र में नाशपाती की खेती हो सकती है. हमने 50 पौधे लगाए थे, सभी सरवाइव कर चुके हैं.
गोंडा. उत्तर प्रदेश इस किसान ने कमाल कर दिखाया है. गोंडा के रहने वाले युवा किसान सुशील निषाद नाशपाती की बागवानी कर रहे हैं. उनकी यह पहल अब आसपास के किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. नाशपाती की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है. लोकल 18 से सुशील बताते हैं कि पहले वह पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. आमदनी सीमित थी. इसी दौरान उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया और बागवानी की ओर कदम बढ़ाया. जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने नाशपाती की खेती शुरू करने की योजना बनाई. सुशील बताते हैं कि नाशपाती की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने इसके बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की. उन्होंने विशेषज्ञों से सलाह ली और यह समझा कि किस प्रकार की मिट्टी और जलवायु इस फसल के लिए उपयुक्त होती है. पूरी तैयारी के बाद उन्होंने अपने खेत में नाशपाती के पौधे लगाए.
सुशील के मुताबिक, शुरुआत में लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं था कि गोंडा जैसे क्षेत्र में नाशपाती की सफल खेती हो सकती है. लेकिन उन्होंने मेहनत और सही तकनीक के दम पर इस सोच को बदल दिया. समय-समय पर पौधों की देखभाल, सिंचाई और पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसका अच्छा परिणाम देखने को मिला. सुशील कहते हैं कि इन दिनों हमारी नाशपाती में फल आया हुआ है.
क्या है आगे का प्लान
सुशील निषाद बताते हैं कि हमने 50 पौधे लगाए थे, सभी सरवाइव कर चुके हैं. भविष्य में इसे और आगे बढ़ाना है क्योंकि नाशपाती आमदनी का एक अच्छा विकल्प है. इसकी डिमांड मार्केट में अच्छी रहती है. सुशील का कहना है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ यदि किसान बागवानी और नई फसलों को अपनाएं तो उनकी आमदनी बढ़ सकती है. नाशपाती को खेत के चारों तरफ लगाने से बाड़ का काम करता है, जिससे छुट्टा जानवर खेत में नहीं जा पाते हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें