फैक्ट्रियों में घुसा पानी, खराब हो रही मशीनें…ग्रेटर नोएडा मे यै कैसी आफत?

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फैक्ट्रियों में घुसा पानी, खराब हो रही मशीनें…ग्रेटर नोएडा मे यै कैसी आफत?


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Greater Noida Ground Report : ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक इकाइयां मुसीबत में घिर गई हैं. भारी बारिश के बाद सड़कें और नालियां जलमग्न से पानी कई फैक्ट्रियों के अंदर तक पहुंच गया. कई इकाइयों में दो से तीन फीट तक पानी भरने से मशीनों, स्पेयर पार्ट्स और दूसरे सामान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है. उद्यमी मनोज सिंघल ने लोकल 18 को बताया कि उनकी यूनिट 26 नंबर प्रॉपर्टी पर है. मशीनें और बड़ी संख्या में स्पेयर पार्ट्स पानी में डूब गए हैं. नुकसान काफी ज्यादा होने की आशंका है. उद्यमी एमपी शुक्ला ने कहा कि ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं ही उद्योगों के विकास में बड़ी बाधा बन रही हैं.

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ग्रेटर नोएडा. बारिश ने ग्रेटर नोएडा स्थित UPSIDA साइट-5 की औद्योगिक इकाइयों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भारी बारिश के बाद सड़कें और नालियां जलमग्न हो गईं और पानी ओवरफ्लो होकर कई फैक्ट्रियों के अंदर तक पहुंच गया. उद्यमियों के मुताबिक कई इकाइयों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया. इससे मशीनों, स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है. उद्यमियों का कहना है कि जलभराव की समस्या नई नहीं है, बल्कि हर बारिश में उन्हें इसी परेशानी से जूझना पड़ता है. कई बार शिकायत और आश्वासन के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका है. साइट-5 के आई ब्लॉक में पैकेजिंग मशीन का काम करने वाले उद्यमी मनोज सिंघल ने लोकल 18 को बताया कि उनकी यूनिट 26 नंबर प्रॉपर्टी पर है. बारिश से सड़क पर करीब पांच फीट तक पानी जमा हो गया था. सड़क का पानी ओवरफ्लो होकर फैक्ट्री के अंदर पहुंच गया. देखते ही देखते यूनिट में दो से तीन फीट तक पानी भर गया. मशीनें और बड़ी संख्या में स्पेयर पार्ट्स पानी में डूब गए हैं. अभी पानी निकलने के बाद नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा, लेकिन नुकसान काफी ज्यादा होने की आशंका है.

स्थिति खराब

मनोज सिंघल ने बताया कि जलभराव को लेकर वह संबंधित अधिकारियों से पिछले करीब दो वर्षों से शिकायत कर रहे हैं. फैक्ट्री के सामने खाली प्लॉट में सीवेज और बारिश का पानी जमा होता है. वहां पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी का निकास नहीं हो पाता. जब सड़क का निर्माण हुआ था, उसी समय अधिकारियों को सड़क के स्लोप और भविष्य में पानी भरने की आशंका के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया. आईईए के अध्यक्ष उद्यमी संजीव शर्मा ने बताया कि फरवरी-मार्च के बाद से साइट पर सफाई व्यवस्था को लेकर स्थिति खराब है. सफाई कर्मियों से संबंधित व्यवस्था और काम का अनुबंध भी प्रभावित रहा है. नालियां भरी हुई हैं और कई जगह जाम हैं. पीछे की ओर देखने पर भी बड़ी मात्रा में गंदा पानी जमा दिखाई देता है. उनका आरोप है कि उद्यमी लंबे समय से अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही.

स्थायी समाधान नहीं

संजीव शर्मा ने कहा कि बारिश रुकने के बाद पानी निकालने के लिए पंप लगाने की बात की जाती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. उनका कहना है कि यदि ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाए तो हर साल पैदा होने वाली समस्या से उद्योगों को राहत मिल सकती है. उद्यमी एमपी शुक्ला ने कहा कि ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं ही उद्योगों के विकास में बड़ी बाधा बन रही हैं. उद्यमियों को यह समझ नहीं आ रहा कि मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो उद्योगों को आगे कैसे बढ़ाया जाएगा. जलभराव के कारण फैक्ट्रियों के बाहर ही नहीं, बल्कि बेसमेंट और उत्पादन क्षेत्र तक पानी पहुंच गया.

हर साल आने वाली समस्या

आईईए के फाउंडर प्रेसिडेंट पीके तिवारी ने इसे हर साल सामने आने वाली समस्या बताया. उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है. उद्यमियों को इसके लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए. पानी निकालने के लिए टैंकर लगाया गया है और कई फैक्ट्रियों में हालात बेहद खराब रहे. उनका कहना है कि केवल दो दिन की बारिश में यदि उद्योगों की ऐसी स्थिति हो जाती है तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. साइट-5 के उद्यमी विकास जैन ने बताया कि वह करीब छह-सात साल से यहां रहकर काम कर रहे हैं और हर बारिश के मौसम में इसी तरह की समस्या सामने आती है. फैक्ट्रियों के बाहर घुटनों से ऊपर तक पानी जमा हो जाता है और बारिश बंद होने के बाद भी दो-तीन दिन तक पानी जस का तस बना रहता है.

क्या बोले अधिकारी

उद्यमी संदीप ने कहा कि एक बारिश के बाद ही दो से तीन दिन तक पानी भरा रहता है. लगातार बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है. ड्रेनेज व्यवस्था ठीक नहीं होने से कर्मचारी फैक्ट्री तक नहीं पहुंच पाते और उत्पादन भी प्रभावित होता है. UPSIDA के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा ने बताया कि समस्या को संज्ञान में लिया गया है और जल्द इसका निदान कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए भी काम किया जाएगा. UPSIDA सिविल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक एके जैन ने बताया कि पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि समस्या के समाधान के लिए विस्तार से काम किया जा रहा है और जल्द उद्यमियों को राहत मिलेगी.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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