आगरा का वो सबसे पुराना और पहला बाग, जिसे कहा जाता था ‘आरामबाग’, जानिए इतिहास

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आगरा का वो सबसे पुराना और पहला बाग, जिसे कहा जाता था ‘आरामबाग’, जानिए इतिहास


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Agra News: आगरा का रामबाग प्राकृतिक सौंदर्य के भरपूर नजारों से भरा हुआ है. उन्होंने कहा कि जब सन 1528 में इसे बनवाया गया, तब उस समय इसमें खूबसूरत फूलों को लगाया गया था. आइए इस बाग के पूरे इतिहास के बारे में जानते हैं.

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को एतिहासिक नगरी के तौर पर जाना जाता है. कई सालों तक मुगलों ने आगरा में रहकर हुकूमत चलाई थी. इस दौरान मुगलों ने कई खूबसूरत ईमारतों का निर्माण भी आगरा में कराया, जिसे आज वर्तमान में भी लोग देखते हैं. आज एक ऐसे बाग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका निर्माण मुगल बादशाह ने अपने आराम और मनोरंजन के लिए कराया था.

कहा जाता है कि यह पहला और पुराना उद्यान है, जिसे अब रामबाग के नाम से जाना जाता है. पहले इसे मुग़ल आरामबाग कहते थे, क्योंकि बादशाहों के लिए आराम का स्थान हुआ करता था. इतिहासकार बताते हैं कि इसे मुगल बादशाह बाबर ने बनवाया था. इसका निर्माण सन 1528 में हुआ था. इसे शुरुआत में बाग-ए-गुल-अफशां का नाम दिया गया था. इसका अर्थ है कि फूल बिखरने वाला बाग. बताया जाता है कि इस बाग में इतने खूबसूरत फूल और पौधे हुआ करते थे कि बादशाह को आराम करने के लिए यह स्थान सबसे प्रिय था.

प्राकृतिक सौंदर्य के भरपूर नजारे
आगरा कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बताया कि आगरा का रामबाग प्राकृतिक सौंदर्य के भरपूर नजारों से भरा हुआ है. उन्होंने कहा कि जब सन 1528 में इसे बनवाया गया, तब उस समय इसमें खूबसूरत फूलों को लगाया गया था. कई ऐसे खुशबूदार फूल थे, जो बाहर से मंगवाकर यहां लगाए गए थे, जिस कारण इसका नाम बाग-ए-गुल-अफशां रखा गया. मुगल बादशाह बाबर अपनी थकान मिटाने और आराम करने अक्सर इस बाग में आया करते थे, जिस कारण बाद में इसका नाम बदलकर आरामबाग रखा गया.

वर्तमान में भी कई खूबसूरत फूल और पेड़-पौधे यहां लगे हुए हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आज यह बाग सरंक्षित है. प्रोफेसर ने बताया कि गर्मियों के समय बादशाह अपनी रानियों के साथ यहां समय बिताते थे. यह उनके आराम और मनोरंजन के लिए बहतर स्थान माना जाता था.

18वीं सदी में इसका नाम रामबाग
आगरा के वरिष्ठ प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बताया कि रामबाग का इतिहास मुगलकाल से जुडा हुआ है. उन्होंने कहा कि 18वीं शताब्दी से पहले इस बाग को आरामबाग के नाम से जाना जाता था. उन्होंने कहा कि जब 18वीं शताब्दी में आगरा में मराठाओं का शासन आया, तो उन्होंने इस स्थान का नाम बदलकर रामबाग रख दिया. इसके बाद आज तक इसका नाम बदला नहीं गया, जिस कारण वर्तमान मे भी यह इसी नाम से जाना जाता है.

प्रोफेसर ने बताया कि इसके अतिरिक्त अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान भी इस जगह को विश्राम स्थल के रूप में इस्तेमाल किया गया और यहां कुछ नई इमारतें भी बनवाई गई थी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह क्षेत्र आगरा का एक प्रमुख और घनी आबादी वाला इलाका बन चुका है. वर्तमान में यह बाग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया जा रहा है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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