‘बनारस की 8 सीटों पर BJP को हराएगी कांग्रेस’, अजय राय के दावों में कितना दम?

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‘बनारस की 8 सीटों पर BJP को हराएगी कांग्रेस’, अजय राय के दावों में कितना दम?


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होटल व्यवसायी विनीत राय हत्याकांड के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की ओर से दिए गए बयान पर राज्य की राजनीति गरमा गई है. आवेश में आकर अजय राय ने महोबा में खुले मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक कॉमेंट कर गए. इसके बाद वह इसपर मिट्टी डालने के बजाय हवा देने में जुटे हैं. जवाब में बीजेपी की तरफ से भी उनपर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं. एक तरफ अजय राय का पीएम मोदी पर दिए गए बयान के बाद बीजेपी का दावा है कि वाराणसी और पूरे पूर्वांचल से अब कांग्रेस का बोरिया बिस्तर बंधने का इंतजाम हो गया है. वहीं इसके जवाब में अजय राय ने दावा किया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सभी आठ सीटें जीतेगी.

बीजेपी की ओर से सख्त पलटवार किए जाने के बाद अजय राय भी पीछे हटने के बजाय कहा- ‘चाहे मेरा एनकाउंटर करवा दें या मेरे परिवार की हत्या, मेरा घर गिरवा दें, कितना भी प्रताड़ित कर ले कोई, लेकिन मैं भगोड़ा नहीं हूं और भागने वाला नहीं हूं. मैं महादेव का सच्चा भक्त हूं, मेरा सिर्फ इतना कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग जगह पर जो पीड़ित लोग हैं उनको न्याय कब मिलेगा, यह मेरा सवाल सरकार से है.

इतना ही नहीं, बीजेपी की ओ से बयान देने वाले नेताओं के बारे में अजय राय ने कहा- ‘मैं पांच बार विधायक रहा हूं और जब बीजेपी से विधायक और मंत्री रहा तब यही नेता हमारे आगे पीछे चलते रहे और उस समय मैं माफिया नहीं था, लेकिन आज जब मैं कांग्रेस की तरफ से आम जनता की आवाज उठा रहा हूं तो यह मुझे माफिया बताते हैं, जबकि हकीकत तो यह है कि बीजेपी सरकार गुंडे माफिया को संरक्षण दे रही है.’

अजय राय के पीएम पर किए अभद्र कॉमेंट पर सीएम योगी भी हो चुके हैं नाराज

अजय राय की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी आपत्ति जताई है. सीएम के सोशल मीडिया पेज पर लिखा गया- ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विषय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से की गई अभद्र, असंसदीय और अक्षम्य टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को प्रकट करती है. पूर्व में कांग्रेस के ‘युवराज’ भी अपने कुसंस्कार का परिचय दे चुके हैं. कांग्रेस अब हताशा, निराशा, कुंठा और मानसिक दिवालियेपन के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुकी है. अब देश वासियों से क्षमा मांगने लायक भी स्थिति उनकी नहीं रही है.’

यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखा- ‘जब होने लगे अंत की आहट तो आने लगी शब्दों में गिरावट. देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की अभद्र टिप्पणी कांग्रेस की बौखलाहट, निराशा और राजनीतिक दिवालियेपन को दर्शाती है. बीमार होने पर जिस प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से अजय राय के स्वस्थ होने की कामना की थी, आज उसी जनसेवक को ये अपशब्द कह रहे हैं. दुकान ‘मोहब्बत’ की और नीयत इतनी कड़वी? जब जनता के हित, विकास कार्यों और राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचता, तब कांग्रेस के नेता मर्यादा भूलकर व्यक्तिगत टिप्पणी और अमर्यादित भाषा का सहारा लेते हैं. देश की जागरूक जनता ऐसे अपमानजनक व्यवहार का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देगी.’

पिंडरा बीजेपी विधायक ने वाराणसी से कांग्रेस का अस्तित्व उखड़ने की बात कही

वहीं पिंडरा से बीजेपी विधायक अवधेश सिंह ने कहा कि अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र कॉमेंट कर गाजीपुर और उसके आसपास पूरे पर्वांचल से कांग्रेस को उखाड़ने का खुद ही इंतजाम कर लिया है. इसके जवाब में अजय राय ने एक प्राइवेट न्यूज चैनल से बातचीत में कहा- ‘वो तो 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी में पता चल गया था. मोदी पसीना फेंक दिए थे. बनारस की जनता उन्हें बता देगी की कैसे क्या है. मेरी बात लिखकर रख लीजिए ये 2027 के चुनाव में बनारस की सभी आठ सीटें हारेंगे. सभी आठ सीटों पर जमानत जब्त होगी.’

पिंडरा विधायक के बयान पर अजय राय ने कहा- ‘मैं डंके की चोट पर कहता हूं आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ना केवल पिंडरा बल्कि वाराणसी की सभी आठ सीटें कांग्रेस जीतेगी.’ अब सवाल उठता है कि आखिर अजय राय किस आधार पर वाराणसी जिले की सभी आठ विधानसभा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं. आइए जरा वाराणसी की सभी आठ सीटों का मौजूदा राजनीतिक समीकरण समझने की कोशिश करते हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी जिले की 8 सीटों का हाल

  • पिंडरा: अवधेश सिंह, बीजेपी
  • अजगरा (SC): त्रिभुवन राम, बीजेपी
  • शिवपुर: अनिल राजभर, बीजेपी
  • रोहनियां: डॉ. सुनील पटेल, अपना दल
  • वाराणसी उत्तरी: रविंद्र जायसवाल, बीजेपी
  • वाराणसी दक्षिण: डॉ. नीलकंठ तिवारी, बीजेपी
  • वाराणसी कैंट: सौरभ श्रीवास्तव, बीजेपी
  • सेवापुरी: नील रतरन सिंह पटेल, बीजेपी

यानी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में वाराणसी की सभी आठ सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी, जिसमें से सात पर बीजेपी और एक पर सहयोगी अपना दल के विधायक हैं. अब जरा अजय राय ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इतना बड़ा दावा किया है तो वाराणसी की सभी आठ सीटों का जातीय समीकरण भी समझने की कोशिश करते हैं.

  • पिंडरा विधानसभा सीट: इस क्षेत्र में सबसे बड़ा एकल वोट बैंक कुर्मी (पटेल) समाज का है, जिनकी आबादी लगभग 70,000 से 80,000 के बीच है. यादव वोटरों की संख्या यहां करीब 25,000 से 30,000 के आसपास है. यहां अन्य ओबीसी जातियों में मौर्य, राजभर, पाल, बिंद की भी ठीक ठाक आबादी है. सवर्णों में यहां मुख्य रूप से ब्राह्मण और भूमिहार समाज का दबदबा है. अजय राय भी भूमिहार जाति से ही आते हैं. पिंडरा क्षेत्र में ब्राह्मण वोटरों की संख्या लगभग 55,000 से 60,000 के बीच है. वे यहां एक बहुत मजबूत और संगठित वोट बैंक हैं. भूमिहार समाज के वोट यहां काफी प्रभावशाली भूमिका में हैं. इस विधानसभा में दलित वोटरों की संख्या करीब 50,000 के आसपास आंकी जाती है. वहीं मुस्लिम वोटरों की संख्या 15,000 से 20,000 के बीच मानी जाती है.
  • अजगरा सीट: अजगरा सीट पर सबसे बड़ी आबादी यादव वोटरों की है, जो लगभग 70,000 से 75,000 के बीच है. राजभर और मौर्य वोटरों की आबादी लगभग 30,000 से 35,000 है. दलित आबादी करीब 20-22 फीसदी है, जिसमें अकेले जाटव 55,000 से 60,000 के आसपास है. पासी, धोबी और खटीक करीब 15,000 से 20,000 के बीच हैं. अजगरा क्षेत्र में ब्राह्मण और ठाकुर वोटरों की संयुक्त संख्या लगभग 50,000 से 55,000 के बीच है. अजगरा के ग्रामीण इलाके में मुस्लिम आबादी लगभग 12,000 से 15,000 के आसपास मानी जाती है.
  • शिवपुर सीट: इस सीट पर राजभर और मौर्य वोटरों की संख्या करीब 55,000 से 60,000 और मौर्य/कुशवाहा मतदाता करीब 40,000 से 45,000 के बीच हैं. यादव वोटरों की संख्या भी यहां लगभग 45,000 के आसपास हैं. ब्राह्मण/क्षत्रिय/भूमिहार वोटरों की संख्या करीब 60,000 से 65,000 है, जिनमें ब्राह्मण और ठाकुर मुख्य रूप से प्रभावी हैं. दलित वोटरा लगभग 40,000 और मुस्लिम मतदाता करीब 20,000 के आसपास हैं.
  • रोहनियां सीट: इस सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक कुर्मी बिरादरी का है. यहां करीब 80,000 से 85,000 पटेल वोटर हैं. यादव वोटरों की संख्या लगभग 45,000 से 50,000 है. भूमिहार वोटर यहां करीब 50,000 है. दलित वोटर करीब 40,000 और मुस्लिम वोटर लगभग 25,000 हैं.
  • वाराणसी उत्तरी सीट: यह पूरी तरह से वाराणसी शहर की कोर शहरी सीट है. यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग 1 लाख से 1.10 लाख के बीच है. इनमें बड़ी आबादी अंसारी और बुनकर समाज की है. वैश्य (बनिया) लगभग 60,000 से 65,000 है. ब्राह्मण वोटरों की संख्या करीब 45,000 और राजपूत मतदाता करीब 20,000 हैं. मौर्य, राजभर और साहू को मिलाकर करीब 50,000 के पार जाती है.
  • वाराणसी दक्षिणी: इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 65,000 से 70,000 के बीच है. वैश्य (व्यापारी) मतदाताओं की संख्या भी करीब 55,000 से 60,000 है. मुस्लिम मतदाताओं की भारी आबादी है, जो करीब 85,000 से 90,000 के आसपास है. यादव मतदाता करीब 20,000 और मराठी/बंगाली समाज के मतदाता भी यहां ठीक-ठाक संख्या लगभग 15,000 में हैं.
  • वाराणसी कैंट: इस सीट पर सवर्ण मतदाताओं की संख्या सबसे भारी है. ब्राह्मण करीब 70,000, कायस्थ (लाला) करीब 55,000 से 60,000, और क्षत्रिय करीब 35,000 हैं. व्यापारिक वर्ग के मतदाता यहां लगभग 50,000 के करीब हैं. मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 45,000 और यादव मतदाताओं की संख्या करीब 30,000 है. दलित मतदाता करीब 35,000 के आसपास हैं.
  • सेवापुरी सीट: यहां पटेल (कुर्मी) मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा यानी लगभग 65,000 से 70,000 है. भूमिहार समाज के मतदाता भी यहां 35,000 से 40,000 के बीच हैं. यादव वोट बैंक भी यहां करीब 45,000 है. ब्राह्मण वोटरों की संख्या करीब 35,000 है. दलित वोटर लगभग 40,000 और राजभर/पाल मतदाता करीब 30,000 हैं.

अजय राय के दावे पर सवाल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि कांग्रेस अकेले लड़ेगी या किसी पार्टी के साथ गठबंधन में. हां बातें जरूर हो रही है कि 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर 2027 में भी कांग्रेस एक बार फिर से समजावादी पार्टी के साथ गठबंधन में अखिलेश यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी. अभी तक इस गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. अगर मान भी लें कि यह गठबंधन जारी रहेगा तो सवाल उठता है कि क्या अखिलेश यादव वाराणसी की सभी आठ विधानसभा सीटें कांग्रेस को दे देंगे. सवाल उठता है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय किस बुनियाद पर इस तरह के दावे कर रहे हैं यह हर किसी के समझ से परे है.



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