प्राकृतिक खेती अपना कर किसान कम लागत में प्राप्त कर सकते हैं दोगुनी पैदावार, जाने

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प्राकृतिक खेती अपना कर किसान कम लागत में प्राप्त कर सकते हैं दोगुनी पैदावार, जाने


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प्राकृतिक खेती के एक्सपर्ट राजेश पांडे बताते हैं कि प्राकृतिक खेती एक संतुलित खेती कहलाती है. जो नेचर के साथ और नेचर की दी हुई चीजों से ही की जाती है. इस खेती में इस्तेमाल होने वाली सारी वस्तुएं प्राकृतिक आधार पर उपलब्ध होनी चाहिए. खाद से लेकर बीज तक सब कुछ प्राकृतिक आधार पर तैयार होना चाहिए. प्राकृतिक खेती के लिए पशुपालन और जैविक विविधता के हिसाब से खेती करनी होती है. राजेश पांडे बताते हैं कि किसान फसल उत्पादन से लेकर खेत की सुरक्षा करने तक के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

आजमगढ़: आज कल ऑर्गेनिक फार्मिंग लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है. ऑर्गेनिक आधार पर उत्पादित होने वाली फसलों की डिमांड मार्केट में खूब हो रही है. ऐसे में ऑर्गेनिक खेती आजकल किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती. सबसे खास बात यह है कि ऑर्गेनिक आधार पर की जाने वाली खेती से उत्पादित फसल केमिकल रहित होती है जिसके कारण उनकी मार्केट में डिमांड भी अधिक होती है और इसके मूल्य भी अधिक मिलते हैं प्राकृतिक खेती अपनाकर जहां एक तरफ अपने खेती के लागत को आधा कर सकते हैं वही चार गुना अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं.

खाद बीज प्राकृतिक विधि से करें तैयार

प्राकृतिक खेती के एक्सपर्ट राजेश पांडे बताते हैं कि प्राकृतिक खेती एक संतुलित खेती कहलाती है. जो नेचर के साथ और नेचर की दी हुई चीजों से ही की जाती है. इस खेती में इस्तेमाल होने वाली सारी वस्तुएं प्राकृतिक आधार पर उपलब्ध होनी चाहिए. खाद से लेकर बीज तक सब कुछ प्राकृतिक आधार पर तैयार होना चाहिए. प्राकृतिक खेती के लिए पशुपालन और जैविक विविधता के हिसाब से खेती करनी होती है. राजेश पांडे बताते हैं कि किसान फसल उत्पादन से लेकर खेत की सुरक्षा करने तक के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. खेत को बायो फेंसिंग करके उसे सुरक्षित बनाया जा सकता है और इसके साथ-साथ कुछ अतिरिक्त उत्पाद भी किसानों को मिल सके.

गोवंश के गोबर का होता है प्रयोग

आजकल जहां एक तरफ खेतों में केमिकल आधारित खाद की मांग बढ़ रही है. वहीं प्राकृतिक कृषि अपनाते हुए किसान जैविक खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. जो फसल के साथ-साथ खेत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. प्राकृतिक खाद बनाने के लिए देशी गोवंश के गोबर का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा कीट नियंत्रण करने के लिए भी किसी केमिकल या दवा के छिड़काव की जरूरत नहीं होती बल्कि बायो फेंसिंग लगाकर भी हम यह काम बेहद आसानी से कर सकते हैं. प्राकृतिक खाद्य तैयार करने के लिए किसान देसी गाय के गोबर का इस्तेमाल करते हुए जीवामृत घन जीवामृत तैयार कर सकते हैं. जो फसल की गुणवत्ता के साथ-साथ खेत की मिट्टी को भी बेहतर बनाते हैं उससे उनकी उर्वरक क्षमता बढ़ती है और उत्पादन भी अधिक प्राप्त होता है.

राजेश पांडे बताते हैं कि उनके द्वारा अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक आधार पर खेती करने के लिए मोटिवेट किया जा रहा है और उनके द्वारा किसानों को मुफ्त में ट्रेनिंग और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग प्राकृतिक आधार पर खेती कर सके और फसलों का उत्पादन करते हुए एक तरफ लाभ भी प्राप्त हो सके और गुणवत्ता युक्त फसलों का उत्पादन भी किया जा सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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