यूरिया-DAP की छुट्टी! खेती में चाहिए मोटा मुनाफा? 20 दिन में तैयार करें गोबर वाली चायपत्ती
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Agriculture Tips for Farmers: बढ़ती लागत और महंगे रसायनों से परेशान किसानों के लिए ‘घनजीवामृत’ एक वरदान साबित हो रहा है. गाय के गोबर और गोमूत्र से मात्र 20 दिन में तैयार होने वाली यह जैविक खाद खेतों से यूरिया और डीएपी जैसे खतरनाक रसायनों की हमेशा के लिए छुट्टी कर देती है. बहराइच के एक सफल किसान के अनुभव के साथ जानिए कि कैसे बेहद आसान विधि से घर पर ही चाय पत्ती जैसे दानों वाला उत्तम घनजीवामृत तैयार किया जा सकता है, जो खेती की लागत को आधी करके पैदावार और मुनाफे को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाता है.
बहराइच: अगर आप भी रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतों और खेती के लगातार बढ़ते खर्चों से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बेहद काम की खबर है. अपनी खेती की लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने के लिए आप ‘घनजीवामृत’ का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह एक ऐसी जादुई जैविक खाद है जो पूरी तरह प्राकृतिक है और मिट्टी को पहले से कहीं ज्यादा उपजाऊ बना देती है. इसे घर पर बनाना बेहद आसान है और यह मात्र 20 दिन के एक छोटे से प्रोसेस में तैयार हो जाती है.
घनजीवामृत बनाने की प्रक्रिया कोई जटिल नहीं है, इसके लिए आपको मुख्य रूप से गाय का गोबर, गोमूत्र और तरल जीवामृत की आवश्यकता होती है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले जमीन पर एक से डेढ़ फीट मोटा गाय के गोबर का एक बेड यानी ढेर बिछा लें. अब एक डंडे की मदद से इस गोबर के ढेर में जगह-जगह जिग-जैग यानी टेढ़े-मेढ़े छेद बना लें और इन छेदों के अंदर तरल जीवामृत को अच्छी तरह डाल दें.
20 दिन में तैयार हो जाएगा खेतों का पॉवर बूस्टर
इसके बाद इसे 10 दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर 10 दिन पूरे होने के बाद ठीक यही प्रक्रिया दोबारा दोहराएं. इस बार फावड़े की मदद से पूरे गोबर को ऊपर-नीचे करके अच्छी तरह मिला लें और फिर से अगले 10 दिनों के लिए छोड़ दें. इस तरह ठीक 20वें दिन घनजीवामृत बिल्कुल बारीक और सूखे चाय पत्ती के दानों की तरह तैयार हो जाएगा, जब यह इस रूप में आ जाए तो समझ लीजिए कि यह खेतों में डालने के लिए पूरी तरह तैयार है.
खेत में डालने की सही मात्रा, यूरिया की नहीं पड़ेगी जरूरत
खेत में इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान है और हर साल इसकी जरूरत कम होती जाती है. पहले साल आपको अपने खेत में प्रति एकड़ के हिसाब से डेढ़ टन घनजीवामृत डालना होगा. दूसरे साल भी आपको इतनी ही यानी डेढ़ टन मात्रा की जरूरत पड़ेगी. लेकिन असली जादू तीसरे साल से शुरू होता है, जब जमीन की अपनी ताकत वापस लौट आती है. तीसरे साल आपको सिर्फ ढाई क्विंटल प्रति एकड़ घनजीवामृत डालना होगा और इसके बाद आगे के हर साल बस यही ढाई क्विंटल की मात्रा आपके पूरे खेत के लिए काफी होगी. यानी हर साल आपका खर्चा और मेहनत दोनों लगातार कम होते जाएंगे.
बहराइच के मुन्नालाल ने बदली अपनी किस्मत
बहराइच जिले के चिलवरिया इलाके के रहने वाले किसान मुन्नालाल वर्मा पिछले कई सालों से इसी देसी और जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं. इस जादुई खाद की बदौलत उन्होंने अपने खेतों से रसायनों को हमेशा के लिए टाटा-बायबाय कह दिया है. मुन्नालाल बताते हैं कि इससे न सिर्फ उनकी फसलों की क्वालिटी बेहतरीन हुई है और पैदावार बढ़ी है, बल्कि बाजार से महंगी खाद-दवाइयां खरीदने का उनका पूरा पैसा भी बच रहा है. मुन्नालाल अब अपने आस-पास के तमाम दूसरे किसानों को भी इस घाटे के सौदे वाली रासायनिक खेती को छोड़कर घनजीवामृत अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि हर किसान कम लागत में तगड़ा मुनाफा कमा सके.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें