दिल्ली में चुना जाएगा राम मंदिर का सीईओ, 18 जुलाई तक आवेदन, क्या होंगी योग्यता?
Ram Mandir CEO Latest Update: दान चोरी के बाद प्रभु श्री रामलला के मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में कई बदलाव किए जा रहे हैं. चंपत राय से लेकर अनिल मिश्रा तक का इस्तीफा, कृष्ण मोहन का अंतरिम महा-सचिव चुना जाना- ये सभी फैसले 6 जुलाई को लिए गए थे. इसी दिन एक फैसला ये भी लिया गया था कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के चयन के लिए एक हाई लेवल की चयन समिति का गठन किया गया. आज यानी शनिवार को इसी समिति का दिल्ली में बैठक आयोजित हुआ था. इसमें सीईओ पद के लिए जरूरी अर्हताएं जारी किया गया. जैसे कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए कौन आवेदन कर सकता है, क्या एजुकेशनल बैकग्रांउड होनी चाहिए.
सूत्रों से मिली ताजा और एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, इस पद के चयन के लिए दिल्ली में बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सीईओ पद के लिए आवश्यक नियमों, शर्तों और कड़ी योग्यताओं (Eligibility Criteria) का निर्धारण कर दिया गया है. राम मंदिर का प्रशासनिक ‘बॉस’ बनने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख भी तय हो चुकी है.
18 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन
राम मंदिर ट्रस्ट की नवगठित तीन सदस्यीय चयन समिति की दिल्ली में बैठक हुई. इस जिम्मेदारी से भरे पद के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 तक अपना आवेदन भेज सकते हैं. 18 जुलाई के बाद आने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा.
सीईओ बनने के लिए योग्यताएं?
राम मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनना कोई आसान बात नहीं है. यह पद सीधे तौर पर करोड़ों सनातन से जुड़ा है, तो किसी भी प्रकार से कोताही नहीं बरती जा सकती है. इस जिम्मेदारी के तहत मंदिर की सुरक्षा, वीआईपी मूवमेंट और भारी-भरकम वित्तीय बजट के प्रबंधन से जुड़ा है, इसलिए चयन समिति ने पात्रता के बेहद सख्त मानक तय किए हैं:-
हिंदू होना अनिवार्य: इस पद के लिए पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक का हिंदू धर्म से होना अनिवार्य है.
शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम ग्रेजुएट होना जरूरी है. उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है.
20 साल का प्रशासनिक/फाइनेंसियल अनुभव: आवेदक के पास प्रशासनिक या फाइनेंस क्षेत्र में काम करने का कम से कम 20 वर्ष का एक लंबा और बेदाग अनुभव होना चाहिए. आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) या कारपोरेट जगत के शीर्ष पदों से सेवानिवृत्त अधिकारी इस श्रेणी में फिट बैठ सकते हैं.
टेंपल मैनेजमेंट का अनुभव: उम्मीदवार के पास बड़े मंदिरों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए, ताकि वह त्योहारों और विशेष अवसरों पर अयोध्या में उमड़ने वाली लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को कुशलतापूर्वक और बिना किसी अव्यवस्था के मैनेज कर सके.
तीन साल तक अयोध्या में ही रहना होगा
चयन समिति ने साफ कर दिया है कि यह नियुक्ति केवल तीन साल के कार्यकाल के लिए ही होगी. कार्य प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में इस कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही, चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्त होने वाले सीईओ को अनिवार्य रूप से अयोध्या में ही स्थायी निवास करना होगा, ताकि वे मंदिर की 24 घंटे की गतिविधियों पर अपनी सीधी नजर रख सकें.
सीईओ के काम के दबाव और उनकी सहायता के लिए एक और विशेष अधिकार दिया गया है. राम मंदिर के नवनियुक्त सीईओ अपनी सहायता और प्रशासनिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए खुद एक सचिव (Secretary) की नियुक्ति कर सकेंगे.