नेपाल में बरसात, UP के किसानों पर आफत… पानी में डूब जाती है सालभर की मेहनत

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नेपाल में बरसात, UP के किसानों पर आफत… पानी में डूब जाती है सालभर की मेहनत


महराजगंज: बारिश का समय किसी के लिए खुशी तो किसी के लिए मुसीबत बनकर आता है. जहां हल्की-फुल्की बारिश किसान के फसल के लिए फायदेमंद होती है, तो वहीं ज्यादा बारिश बाढ़ का रूप ले लेती है और किसान के फसल को बर्बाद भी कर देती है. ऐसी ही स्थिति यूपी के महराजगंज जिले के के इंडो नेपाल बॉर्डर एरिया में मौजूद गांवों में देखने को मिलती है, जहां के किसान हर साल बाढ़ की स्थिति से जूझते हैं.

महराजगंज जिले की बात करें तो नेपाल के पहाड़ों से होकर कई छोटी और बड़ी नदियां जैसे गंडक नदी, झरही उर्फ प्यास नदी महराजगंज जिले से होकर गुजरती है, जिसके आसपास सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ खेत है. मानसून का समय शुरू होते ही नेपाल के पहाड़ों में जैसे ही बारिश शुरू होती है, इन नदियों का जलस्तर बढ़ने लगता है, जिसका प्रभाव इन क्षेत्र के किसानों के फसलों पर भी देखने को मिलता है.

पूरे सीजन अपनी मेहनत और परिश्रम से तैयार की फसल
जैसे ही दो-तीन दिन नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होती है, इन सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ फसले पानी से लबालब भर जाती हैं और जिस फसल को किसानों ने पूरे सीजन अपनी मेहनत और परिश्रम से खड़ा किया होता है, वह उनके सामने ही बर्बाद होने लगती है. बरसात के समय में जब बाढ़ की स्थिति बनती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान किसानों के धान, गन्ने और अन्य मौसमी फसलों को होती है.

किसानों को बाढ़ से दिखता है बर्बादी का मंजर
बरसात के समय में महराजगंज जिले के इंडो-नेपाल बॉर्डर एरिया में ज्यादातर गांव बाढ़ की स्थिति से संघर्ष करते हैं. पहाड़ों में जैसे ही भारी बारिश शुरू होती है, उधर से आने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, जिसका सीधा प्रभाव इन सीमावर्ती क्षेत्र में बसे गांव में देखने को मिलता है. जैसे ही बाढ़ की स्थिति बनती है, इस क्षेत्र के किसानों के सैकड़ों एकड़ फासले बर्बाद होने लगते हैं. किसानों के लिए यह संघर्ष का समय कोई नया नहीं है, बल्कि हर साल उन्हें इस तरह बाढ़ से होने वाली बर्बादी का मंजर देखना पड़ता है. जिस फसल को किसानों ने पूरे सीजन अपना की जान लगाकर तैयार किया होता है, बारिश का समय बढ़ते ही वह अपने आंखों से ही उसे बर्बाद होता भी देखते हैं.

हर साल इस तरह किसानों की फसल बर्बाद होने के बावजूद भी इसका कोई स्थाई प्रबंध नहीं मिलने की वजह से किसानों को इसका मर्म झेलना पड़ रहा है. इन सीमावर्ती क्षेत्र में बहुत से किसान ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति भी इन्हीं खेतों पर टिकी हुई है. लेकिन बाढ़ आने की वजह से उन्हें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बरसात के समय में घर से निकलना भी हो जाता है मुश्किल
महराजगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्र की बात करें तो बरसात का समय शुरू होते ही इन क्षेत्रों में पानी जमा होने लगता है. बाढ़ की स्थिति बनने से सिर्फ किसानों की फसले ही बर्बाद नहीं होती हैं, बल्कि उनके आर्थिक स्थिति के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन में भी इसका प्रभाव देखने का मिलता है. जिले के निचलौल क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित भेड़िहारी, सोहगीबरवा, शिकारपुर, भोतहा जैसे कई ऐसे गांव भी हैं, जहां ज्यादा बारिश होने से पानी भर जाता है और लोगों का अपने घरों से निकलना भी मुश्किल हो जाता है.

सामान्यतः कहें तो बाढ़ का समय किसानों के आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक जनजीवन को भी प्रभावित करती है. इस क्षेत्र के ज्यादातर किसान ऐसे हैं, जो सिर्फ एक ही सीजन में खेती कर पाते हैं, क्योंकि उनके खेत नदी के आसपास हैं, जिसकी वजह से मानसून के समय में बाढ़ आने पर उनके खेत में कुछ भी पैदावार नहीं हो पाता है.



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