गाजियाबाद में यहां पीस नहीं, किलो के हिसाब से बिक रहे कलश…50 वाला पट्टा सिर्फ 15 का
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Ghaziabad Kalash Market : जहां आमतौर पर कलश पीस के हिसाब से बिकते हैं, गाजियाबाद की इस दुकान पर कलश किलो के हिसाब से बेचे जा रहे हैं. गाजियाबाद ही नहीं बल्कि दिल्ली, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और अलीगढ़ जैसे कई जिलों से भी कांवड़िए यहां खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. दुकान के संचालक रिंकू गर्ग लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले चार वर्षों से वे कलश पीस के बजाय किलो के हिसाब से बेच रहे हैं. 10 लीटर से लेकर 40 लीटर क्षमता वाले कलश 250 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दिए जा रहे हैं. हरिद्वार में करीब 120 रुपये में मिलने वाली डोरी इस दुकान पर सिर्फ 30 रुपये में मिल रही है.
गाजियाबाद. कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले गाजियाबाद का एक बाजार शिवभक्तों के बीच चर्चा में है. वजह है यहां कलश बेचने का अनोखा तरीका. जहां आमतौर पर कलश पीस के हिसाब से बिकते हैं, डासना गेट बाजार स्थित एक दुकान पर कलश किलो के हिसाब से बेचे जा रहे हैं. कम कीमत में ज्यादा विकल्प मिलने से श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी बचत हो रही है. यही कारण है कि गाजियाबाद ही नहीं बल्कि दिल्ली, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और अलीगढ़ जैसे कई जिलों से भी कांवड़िए यहां खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. कांवड़ यात्रा के बीच यह अनोखी पहल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
पीस के हिसाब से महंगे
गाजियाबाद के डासना गेट बाजार स्थित गर्ग बर्तन भंडार इन दिनों कांवड़ियों की पहली पसंद बना हुआ है. दुकान के संचालक रिंकू गर्ग लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले चार वर्षों से वे कलश पीस के बजाय किलो के हिसाब से बेच रहे हैं. उनका कहना है कि बाजार में अलग-अलग आकार के कलश पीस के हिसाब से महंगे पड़ते हैं, जबकि किलो के हिसाब से बेचने पर श्रद्धालुओं को कम कीमत में बेहतर विकल्प मिल जाता है. इसी वजह से हर साल उनकी दुकान पर ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. दुकान पर एक नंबर से लेकर पांच नंबर तक के कलश उपलब्ध हैं. 10 लीटर से लेकर 40 लीटर क्षमता वाले कलश श्रद्धालुओं को 250 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दिए जा रहे हैं. रिंकू गर्ग का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ व्यापार करना नहीं बल्कि कांवड़ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं का खर्च कम करना भी है ताकि वे बचाए गए पैसे का उपयोग अपनी पूरी यात्रा के दौरान कर सकें.
अब तक 35 हजार बिके
सिर्फ कलश ही नहीं बल्कि यात्रा में काम आने वाला अन्य सामान भी यहां कम कीमत पर मिलता है. कलश बांधने वाला पट्टा, जो हरिद्वार में करीब 50 रुपये प्रति मीटर मिलता है, वह यहां मात्र 15 रुपये प्रति मीटर में दिया जा रहा है. इसी तरह हरिद्वार में करीब 120 रुपये में मिलने वाली डोरी इस दुकान पर सिर्फ 30 रुपये में मिल रही है. रिंकू गर्ग कहते हैं कि पिछले दो महीनों से उनकी दुकान पर कांवड़ यात्रा के लिए कलश की बिक्री शुरू हो गई थी. अब तक करीब 35 हजार से अधिक कलश बिक चुके हैं, जबकि 15 हजार कलश और बिकने का अनुमान है. उनकी दुकान पर सिर्फ गाजियाबाद ही नहीं बल्कि दिल्ली, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और अलीगढ़ समेत कई जिलों से श्रद्धालु खरीदारी करने पहुंच रहे हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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