मैदा नहीं अब खाइए रागी के मोमोज! मुरादाबाद के इनोवेटिव स्टार्टअप की पहल
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Ragi Momos Moradabad: फास्ट फूड के शौकीनों के लिए मोमोज का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन मैदा से बने मोमोज अक्सर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. इसी चिंता को दूर करने और लोगों को स्वाद के साथ बेहतरीन पोषण देने के लिए यूपी के मुरादाबाद में ‘रागी के मोमोज’ तैयार किए जा रहे हैं. मिलेट्स (मोटे अनाज) से बने यह मोमोज न केवल स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. यही वजह है कि बाजार में लॉन्च होते ही इन रागी मोमोज की जबरदस्त डिमांड देखने को मिल रही है.
Ragi Momos Moradabad: यूपी के मुरादाबाद में इन दिनों रागी के मोमोज तैयार किए जा रहे हैं. कहा जाता है कि मार्केट में मिलने वाले मोमोज हमारी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं और तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित कर देते हैं. लेकिन मुरादाबाद में इन दिनों रागी के मोमोज तैयार किए जा रहे हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इसके साथ ही मिलेट्स के इन मोमोज की बहुत अच्छी डिमांड भी देखने को मिल रही है. मिलेट्स के मोमोज स्वाद में बहुत लाजवाब हैं, जिसकी वजह से उनकी बहुत अच्छी डिमांड सामने आ रही है.
6,000 करोड़ रुपये का है मोमोज का बिजनेस
मिलेट्स का उत्पादन करने वाले सीईओ विकास कुमार ने बताया कि रागी के मोमोज की मांग हमें तब मिली जब हमने एक मेले में अपना स्टॉल लगाया था. पंतनगर में भी हमने इस पर थोड़ा काम किया था. मोमोज के बारे में एक छोटा सा आंकड़ा मैं आपके साथ साझा करना चाहूंगा. मैंने गूगल पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया था. भारत में औसतन हर परिवार का एक सदस्य सप्ताह में एक प्लेट मोमोज अवश्य खाता है. इस हिसाब से देखें तो यह लगभग 6,000 करोड़ रुपये का व्यवसाय है.
मैदा के विकल्प के रूप में नया प्रयोग
मैं यह नहीं कह रहा कि मैदा से बनने वाला यह व्यवसाय गलत है. लेकिन क्या हम इसके साथ कोई स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी दे सकते हैं, जिससे स्वाद के साथ-साथ हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर रहे? इसी सोच के साथ हमने रागी के मोमोज को तैयार करने का प्रयोग किया. हमने इन्हें पंतनगर मेले और यहां पंचायत भवन में लगे मेले में भी प्रस्तुत किया था. अब हमारी कोशिश यह है कि हम मौजूदा मोमोज विक्रेताओं को किसी भी तरह से प्रभावित किए बिना नया स्टॉल न खोलें. इसके बजाय हम उन विक्रेताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रागी के मोमोज उपलब्ध कराएं, ताकि जो लोग पहले से मोमोज खाते हैं, उनके पास एक और विकल्प हो.
पोषण संतुलन और बिना सोयाबीन के खास रेसिपी
यदि आप तीन पीस मैदा के मोमोज खा रहे हैं, तो साथ में दो पीस रागी के भी खा लें. इससे कम से कम आपका पोषण संतुलन बना रहेगा. हमारे रागी के मोमोज दो प्रकार में उपलब्ध हैं- रागी पनीर मोमोज और रागी वेजिटेबल मोमोज. हमने इन्हें सोयाबीन के बिना ही बनाया है. सोयाबीन के विषय में एक महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहूंगा. जापान में इस पर शोध हुआ था कि सोयाबीन में एक ऐसा तत्व होता है जो प्रेशर कुकर में पकाने पर भी नहीं गलता. इसीलिए जापानियों ने इसे भंग करके यानी फर्मेंट करके खाने की परंपरा अपनाई. आप देखेंगे कि वे इसका दूध निकालकर फिर उसका उपयोग करते हैं. यदि हम सीधे सोयाबीन खा लें, तो उसका एक अंश पचता ही नहीं है और मल के साथ वैसे ही बाहर निकल जाता है.
मार्केटिंग रणनीति और विक्रेताओं का मार्जिन
अमेरिका ने भी इस तथ्य को नहीं बदला है. चूंकि यह तत्व शरीर में नहीं पचता, इसलिए हमने अपने मोमोज में सोयाबीन का प्रयोग न करने का निर्णय लिया. अभी इसकी कीमत विक्रेताओं के साथ अंतिम रूप से तय नहीं हुई है. मोटे तौर पर यदि कोई विक्रेता 10 पीस मोमोज 100 रुपये में बेचना चाहे, तो हम उसे 25 से 30 प्रतिशत का मार्जिन देना चाहेंगे. इस प्रकार हम 10 पीस मोमोज उन्हें 70 से 75 रुपये में उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे.
About the Author
Rahul Goyal is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations …
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