सुल्तानपुरः बारिश में पशुओं को खिलाएं थाईलैंड में उगने वाली नेपियर घास, बहेगी दूध की धार

0
सुल्तानपुरः बारिश में पशुओं को खिलाएं थाईलैंड में उगने वाली नेपियर घास, बहेगी दूध की धार


Last Updated:

बारिश में पशुओं के चारे की समस्या के लिए नेपियर घास बेहतर विकल्प है. यह थाईलैंड में उगने वाली ‘हाथी घास’ है, जो दूध उत्पादन बढ़ाती है और आर्थिक रूप से फायदेमंद है. इसे गन्ने की तरह बोया जाता है. डॉक्टर दिवाकर ने लोकल 18 को बताया कि नेपियर चारा प्रत्येक 50 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाता है. यह प्रक्रिया कई वर्षों तक लगातार चलती रहती है, जिससे किसानों को बार-बार बीज बोने की आवश्यकता नहीं पड़ती. नेपियर लगाने का सबसे अच्छा समय मार्च का महीना होता है, लेकिन इसकी बुवाई जुलाई-अगस्त में भी की जा सकती है.

ख़बरें फटाफट

Top Deals Inside

सुल्तानपुरः बारिश का मौसम आते ही किसानों को पशुओं के चारे की तालाश में भटकना पड़ता है. क्योंकि खेती बाड़ी डूब जाती है या फिर जंगल हो जाता है. वैसे बहुत बार देखा जाता है कि केवल सूखा भूसा खाकर ही रहते हैं. वहीं बारिश के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए नेपियर चारा एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह घास पशुओं के दूध उत्पादन को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है.

थाईलैंड में उगती है नेपियर घास

बारिश की समस्या को देखते हुए ही किसान अब आधुनिक खेती की ओर बढ़ते हुए नेपियर घास की बो रह हैं. नेपियर घास, जिसे ‘हाथी घास’ भी कहा जाता है, मूल रूप से थाईलैंड में उगने वाली एक विदेशी प्रजाति है. यह गन्ने की तरह दिखती है और इसका आकार काफी बड़ा होता है. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉक्टर दिवाकर के अनुसार, यह चारा पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद है. किसानों के लिए ये आसान हो जाता है.

बार-बार कटाई की सुविधा

डॉक्टर दिवाकर ने लोकल 18 को बताया कि नेपियर चारा प्रत्येक 50 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाता है. यह प्रक्रिया कई वर्षों तक लगातार चलती रहती है, जिससे किसानों को बार-बार बीज बोने की आवश्यकता नहीं पड़ती. नेपियर लगाने का सबसे अच्छा समय मार्च का महीना होता है, लेकिन इसकी बुवाई जुलाई-अगस्त में भी की जा सकती है. अधिक गर्मी और अधिक सर्दी का मौसम इसके लिए अनुकूल नहीं होता, क्योंकि पौधे ठीक से स्थापित नहीं हो पाते. यह एक सदाबहार चारा है. यदि इसके टुकड़े बड़े हों तो इनकी पत्तियां काट देनी चाहिए. इसकी बुवाई हमेशा लाइनों और मेड़ों पर करनी चाहिए, ठीक उसी प्रकार जैसे गन्ने की बुवाई की जाती है. एक बार बोने के बाद यह कई बार कटाई के लिए तैयार रहती है.

About the Author

authorimg

Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *