45-60 दिन में तैयार, 6-7 दानों वाली फलियां… अगस्त में बोएं मटर की ये 3 किस्में
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Green Pea Farming : अगेती हरी मटर की खेती अगस्त के महीने में किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है. किसान AP-3, काशी नंदिनी और मटर अगेता M-7 जैसी किस्मों का चयन करें. किसान बाजार की मांग के अनुसार अलग-अलग मौसम में सब्जियों की खेती करते हैं. हरी मटर भी ऐसी फसल है, जिसकी ताजी फलियों की बाजार में मांग बनी रहती है.
Hari Matar Ki Kheti : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करते हैं. धान और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान कम समय में तैयार होने वाली सब्जियों की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. सब्जियों की खेती किसानों को कम अवधि में आमदनी देने वाली फसल के रूप में आकर्षित करती हैं. किसान अगस्त के महीने में हरी मटर की खेती की तैयारी कर सकते हैं. उचित मौसम, खेत की तैयारी, सिंचाई, पोषण और कीट-रोग प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए तो हरी मटर की फसल से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है.
किसान बाजार की मांग के अनुसार अलग-अलग मौसम में सब्जियों की खेती करते हैं. हरी मटर भी ऐसी फसल है, जिसकी ताजी फलियों की बाजार में मांग बनी रहती है. खासकर जब बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली हरी मटर की आवक कम होती है, तब किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है. इससे कम समय में अधिक मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता है.
हरी मटर को आमतौर पर ठंडे मौसम की फसल माना जाता है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अगेती मटर की खेती उपयुक्त समय और किस्म के चयन के साथ की जाती है. अगस्त में खेती करने वाले किसानों को सबसे पहले अपने क्षेत्र का मौसम, बारिश के मौसम में खेत में पानी रुकना मटर की फसल के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है इसलिए जल निकास की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है.
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अगर आप भी अगस्त के मौसम में अगेती हरी मटर की खेती करना चाहते हैं तो आज हम आपको कुछ बेहतर अगेती हरी मटर की किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं. इससे आप आसानी से 50 से 60 दिन के अंदर लाखों रुपए कमा सकते हैं क्योंकि अगस्त में लगाई हुई मटर अक्टूबर तक निकलने लगती है. इस समय बाजारों में हरी मटर करीब 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है.
अगेती हरी मटर की खेती के लिए किसान AP-3 किस्म का चयन करें. लगभग 35 से 45 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन रहता है. बुवाई के लगभग 60 से 70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. इसकी फली चमकदार, वजनदार और 6 से 7 दानों वाली होती है. बुवाई करते समय लाइन से लाइन की दूरी 16 से 20 सेंटीमीटर रखें. अगस्त और सितंबर के महीने में आप बुवाई कर सकते हैं जिससे आप अच्छा खासा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
काशी नंदिनी हरी मटर की एक प्रसिद्ध अगेती किस्म है, जिसे भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने विकसित किया है. यह किस्म सिर्फ 60 से 65 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है, और इसकी फलियों में मीठे व आकर्षक 6 से 8 दाने होते हैं. इस किस्म की पैदावार भी अधिक होती है, बुवाई करते समय लाइन से लाइन की दूरी 15 से 18 सेंटीमीटर रखना चाहिए, जिससे पौधा स्वस्थ रहता है,प्रति एकड़ 40 से 60 क्विंटल तक उपज मिल जाती है.
मटर अगेता M-7 अगेती (जल्दी तैयार होने वाली) मटर की एक उन्नत और लोकप्रिय किस्म है. यह किस्म अपनी शानदार पैदावार, उच्च तापमान, और विपरीत मौसम को सहन करने की क्षमता के लिए जानी जाती है. यह किस्म बुवाई के मात्र 45 से 52 दिनों के भीतर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. प्रत्येक फली में औसतन 6 से 7 दाने होते हैं. अगेती फसल के लिए इसे 20 अगस्त से लेकर अक्टूबर के पहले और दूसरे सप्ताह तक बोया जा सकता है.