मोरिंग से नीम तक…जानिए कौन सी पत्तियां खाकर सबसे तेज बढ़ती हैं बकरियां?

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मोरिंग से नीम तक…जानिए कौन सी पत्तियां खाकर सबसे तेज बढ़ती हैं बकरियां?


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मोरिंग से नीम तक…जानिए कौन सी पत्तियां खाकर सबसे तेज बढ़ती हैं बकरियां?

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Goat Farming Tips : बकरी पालन किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रहा है. पालक अगर थोड़ी सी सावधानी बरतें तो कम समय में मालामाल हो सकते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में रामपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अश्विनी कुमार से बात की. वे बताते हैं कि बरसात के मौसम में बकरियों को सिर्फ हरा चारा खिलाना सही नहीं. बकरी पालक नीम की पत्तियों को भी आहार का हिस्सा बना सकते हैं. सहजन की नरम पत्तियां और कोमल टहनियां बकरियां आसानी से खा लेती हैं. पशुपालक इन्हें हरे चारे के साथ मिलाकर दे सकते हैं. अमरूद के पेड़ की पत्तियां भी बकरियों के आहार में शामिल की जा सकती हैं. हालंकि किसी भी पेड़ की पत्तियां देने से पहले ध्यान रखें कि वे साफ हों और उन पर कीटनाशक का छिड़काव न हुआ हो.

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बरसात के मौसम में बकरियों को सिर्फ हरा चारा खिलाना हमेशा सही नहीं माना जाता. खेतों के हरे चारे में इस दौरान नमी ज्यादा रहती है, जिससे कुछ बकरियों को पाचन और दस्त की परेशानी हो सकती है. ऐसे में पेड़ों की पत्तियां आहार में शामिल करना उपयोगी विकल्प हो सकता है. इनमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. हरे चारे के साथ सही मात्रा में पत्तियां देने से बकरियों की डाइट में पौष्टिक चारा मिल जाता है. उनकी सेहत बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.

बकरी पालक नीम की पत्तियों को भी आहार का हिस्सा बना सकते हैं. नीम में कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए ग्रामीण इलाकों में इसे पशुओं के लिए उपयोगी पेड़ माना जाता है. बरसात में जब पेट के कीड़ों और पाचन संबंधी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है, तब नीम की पत्तियां संतुलित आहार के साथ दी जा सकती हैं. हालांकि इन्हें जरूरत से ज्यादा खिलाना सही नहीं है. बकरियों को अलग-अलग चारे के साथ सीमित मात्रा में पत्तियां देना बेहतर रहता है.

सहजन यानी मोरिंगा की पत्तियां बकरियों के लिए पौष्टिक चारे का अच्छा विकल्प मानी जाती हैं. इनमें प्रोटीन समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पशुओं की डाइट को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. सहजन की नरम पत्तियां और कोमल टहनियां बकरियां आसानी से खा लेती हैं. पशुपालक इन्हें हरे चारे के साथ मिलाकर दे सकते हैं. सहजन का पेड़ कई जगह आसानी से मिल जाता है इसलिए छोटे पशुपालकों के लिए यह कम लागत वाला चारा विकल्प बन सकता है.

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अमरूद के पेड़ की पत्तियां भी बकरियों के आहार में शामिल की जा सकती हैं. इनमें कुछ पोषक तत्व और प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर उपयोगी हो सकते हैं. पशुपालक अमरूद की साफ और ताजी पत्तियां डालियों के साथ बकरियों को दे सकते हैं. ध्यान रखें कि पत्तियों पर कीटनाशक या कोई रसायन न लगा हो. इन्हें हरे चारे, सूखे चारे और साफ पानी के साथ देना ज्यादा बेहतर रहेगा. केवल अमरूद की पत्तियों को पूरा आहार बनाना सही नहीं है.

अगर नीम, अमरूद या सहजन की पत्तियां उपलब्ध नहीं हैं तो गूलर और अरडू की पत्तियां भी बकरियों को दी जा सकती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ये पेड़ आसानी से मिल जाते हैं और इनकी कोमल पत्तियां बकरियां पसंद से खाती हैं. हालांकि किसी भी पेड़ की पत्तियां देने से पहले यह देखना जरूरी है कि वे साफ हों और उन पर कीटनाशक का छिड़काव न हुआ हो. अलग-अलग तरह के चारे को संतुलित मात्रा में देने से बकरियों को ज्यादा विविध और पौष्टिक आहार मिलता है.

बकरियां जमीन पर पड़े चारे के बजाय कई बार पेड़ या डालियों से पत्तियां तोड़कर खाना ज्यादा पसंद करती हैं, इसलिए पशुपालक साफ पत्तियों वाली छोटी और कोमल डालियां उनके सामने रख सकते हैं. इससे बकरियां अपनी प्राकृतिक आदत के अनुसार पत्तियां खा लेती हैं और चारे की बर्बादी भी कम हो सकती है, लेकिन डालियां बहुत मोटी या नुकीली नहीं होनी चाहिए. गीली, सड़ी या फफूंद लगी पत्तियां बिल्कुल न दें क्योंकि इससे पशुओं की सेहत बिगड़ सकती है.

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अश्विनी कुमार के मुताबिक, बकरियों का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सिर्फ पेड़ों की पत्तियों पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है. अच्छी सेहत और बेहतर उत्पादन के लिए हरा चारा, सूखा चारा, जरूरत के अनुसार दाना, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त साफ पानी देना जरूरी है. पशुओं का समय पर टीकाकरण भी कराया जाना चाहिए. पेड़ों की पौष्टिक पत्तियां इस संतुलित आहार का एक हिस्सा हो सकती हैं. सही पोषण के साथ सही देखभाल मिलने पर बकरियों की ग्रोथ तेजी से बढ़ती है.



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