Lathmar Holi In Jhansi: बरसाना से ज्यादा रोचक है झांसी की लठमार होली, नई….

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Lathmar Holi In Jhansi: बरसाना से ज्यादा रोचक है झांसी की लठमार होली, नई….


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बुंदेलखंड के डागरवाहा गांव में 1100 साल पुरानी लठमार होली की परंपरा है, जहां महिलाएं गुड़ की भेली को बचाने और पुरुष उसे लूटने का प्रयास करते हैं. नई बहुएं भी इसमें हिस्सा लेती हैं.

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Lathmar Holi In Jhansi

हाइलाइट्स

  • बुंदेलखंड के डागरवाहा गांव में 1100 साल पुरानी लठमार होली की परंपरा है.
  • महिलाएं गुड़ की भेली को बचाने और पुरुष उसे लूटने का प्रयास करते हैं.
  • नई बहुएं भी इस अनोखी लठमार होली में हिस्सा लेती हैं.

Lathmar Holi In Jhansi: आपने बरसाना और बृज की लट्ठमार होली के बारे में तो सुना ही होगा. लेकिन बुंदेलखंड में भी एक अलग तरह की लट्ठमार होली होती है. यहां औरतें एक बांस पर बंधी गुड़ की भेली को बचाने की कोशिश करती हैं और आदमी उसे छीनने की कोशिश करते हैं. झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र के डागरवाहा गांव में यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे निभा रहे हैं.

1100 वर्ष पुरानी परंपरा 
डागरवाहा में 1100 साल से भी ज़्यादा समय से एक परंपरा चली आ रही है. होली के अगले दिन यानी दूज को, गांव के मंदिर के पास 35 फीट ऊँचा बांस गाड़ा जाता है. इस बांस के ऊपर, एक गुड़ की पोटली बांधी जाती है. फिर, गांव की औरतें इस पोटली को बचाने की कोशिश करती हैं और आदमी उसे छीनने की कोशिश करते हैं. यह खींचतान बहुत देर तक चलती है. आखिर में, एक छोटा सा बच्चा पूरी फुर्ती से बांस पर चढ़ जाता है और गुड़ की पोटली ले उड़ता है.

नई बहुएं भी लेती हैं हिस्सा 
डागरवाहा गांव में हर साल बड़े धूमधाम से लठमार होली मनाई जाती है. गांव की हर उम्र की महिला इसमें शामिल होती है. 65 साल की बुजुर्ग महिला हो या नई-नवेली बहू, सब मिलकर लठमार होली खेलती हैं. एक महिला ने बताया कि वह पहली बार इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनी है. वहीं एक बुजुर्ग ने बताया कि गांव वालों को होली से ज़्यादा इस लठमार होली का इंतज़ार रहता है.

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