भगवान चले गए, अब कौन सुनेगा? उमाशंकर सिंह के निधन से रो पड़ा पूरा बलिया

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भगवान चले गए, अब कौन सुनेगा? उमाशंकर सिंह के निधन से रो पड़ा पूरा बलिया


Umashankar Singh: जनपद बलिया की रसड़ा विधानसभा से बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके पैतृक आवास रसड़ा के खनवर गांव में दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं. उनका पार्थिव शरीर कुछ ही देर में गांव पहुंचने वाला है, जिसे लेकर लोग उनकी अंतिम विदाई की एक झलक पाने के लिए बेहद भावुक नजर आ रहे हैं. उमाशंकर सिंह को गरीबों का मसीहा कहा जाता था, जो जीवनभर जनता के लिए जीते और मरते रहे. आज उनके आवास पर पहुंचे तमाम लोग रोते-बिलखते नजर आए.

‘आज हर गरीब रो रहा है, हमारा भगवान चला गया’
एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण दिव्यांग हुए एक बुजुर्ग बातचीत करते हुए रो पड़े. उन्होंने रोते हुए कहा कि ऐसे विधायक उन्होंने अपने जीवनकाल में कभी नहीं देखे. उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज हर गरीब रो रहा है क्योंकि उसका भगवान चला गया है. उमाशंकर सिंह न केवल अपनी विधानसभा में, बल्कि पूरे बलिया के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जाकर लोगों की मदद करते थे. उनके द्वार पर जो भी आता था, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता था. बुजुर्ग के आंसू और उनकी बातें ऐसा भावुक कर देने वाला दृश्य उपस्थित कर रही थीं, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को अंदर से झकझोर कर रख दिया.

मसीहा के जाने से प्रकृति भी गमगीन
बलिया के रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद जब लोकल-18 की टीम ने उनके गांव पहुंचकर लोगों से बातचीत की, तो लोग यादें साझा करते-करते रो पड़े. आज ऐसे मसीहा के जाने पर इंद्रदेव भी सुबह से बारिश के रूप में अपने आंसू बहा रहे हैं. रसड़ा विधानसभा निवासी दिव्यांग बुजुर्ग जयप्रकाश ने बताया कि एक सड़क हादसे में उनका एक पैर कट गया था. उन्होंने बताया कि वह विधायक जी की अंतिम विदाई देखने आए हैं और यथाशक्ति उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

551 निर्धन कन्याओं का कराया था विवाह और कन्यादान
जयप्रकाश ने नम आंखों से कहा कि अब ऐसे विधायक दोबारा पैदा नहीं होंगे. उन्होंने याद किया कि विधायक जी ने ही उनके बच्चे की शादी कराई थी. उस समय उमाशंकर सिंह ने इसी रसड़ा विधानसभा में 551 बेटियों का न केवल सामूहिक विवाह कराया था, बल्कि स्वयं कन्यादान भी किया था. उन्होंने नवदंपतियों को सम्मानपूर्वक पलंग, टीवी, पंखा सहित गृहस्थी का तमाम सामान भी उपहार स्वरूप दिया था. आज पूरा रसड़ा विधानसभा अपने ऐसे जनसेवक के लिए तरस-तरस कर रो रहा है. यह कहते हुए दिव्यांग बुजुर्ग फूट-फूटकर रोने लगे.

‘अमीर जो भी सोचें, हम गरीबों का तो सब कुछ लुट गया’
जयप्रकाश ने आगे कहा, “आज भले ही अमीर जो भी सोच रहे हों, लेकिन हम गरीबों का तो सब कुछ चला गया. वह ऐसे दयालु विधायक थे, जिनके पास आने पर वह तुरंत 2000, 4000, 5000 या 10,000 रुपये देकर कहते थे कि जाओ अपनी दवा करा लो, अगर खाने को नहीं है तो खाना खरीदकर खा लो.” यह कहते हुए बुजुर्ग बिलख पड़े. उन्होंने बताया कि रहने के लिए घर न होने पर विधायक जी तुरंत आश्रय की व्यवस्था भी कर देते थे. उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और ऐसे विधायक को एक बार फिर इस धरती पर भेज दें.

राजनीति से ऊपर उठकर की जनसेवा: स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
छात्र शक्ति के पूर्व अभियंता लालू यादव ने कहा कि आज पूरा पूर्वांचल शोक में डूबा है और देश के कोने-कोने से लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए आ रहे हैं. उमाशंकर सिंह ने बेहद कम समय में जनसेवा की एक ऐसी अनूठी मिसाल कायम की है, जो हमेशा याद रखी जाएगी. वहीं कमलेश कुमार ने कहा कि इस विधायक के पास जो भी मदद मांगने आया, वह कभी निराश नहीं हुआ-चाहे कोई सड़क दुर्घटना हो, अचानक हुई मृत्यु हो या कोई प्राकृतिक आपदा. हर स्थिति में विधायक जी आगे बढ़कर गरीबों के साथ खड़े रहते थे. उन्होंने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

कैंसर जैसी भयावह बीमारी में भी सुनते रहे जनता का दुख
सुजीत कुमार सौरभ ने बताया कि उमाशंकर सिंह राजनीति से ऊपर उठकर पूरी तरह जनता के प्रति समर्पित थे. उन्हें अपनी स्थिति का भली-भांति आभास था कि उनके साथ क्या होने वाला है. वह कैंसर जैसी गंभीर और भयावह बीमारी से पीड़ित थे, इसके बावजूद जब भी बलिया आते थे, तो लोगों की समस्याएं जरूर सुनते थे. दूर रहते हुए भी वह लोगों से संवाद बनाए रखते थे. वह मरते दम तक केवल अपनी जनता के बारे में सोचते रहे. अपने जीवनकाल में उनके जैसे महान और संवेदनशील व्यक्तित्व का धनी इंसान नहीं देखा.

वहीं बुजुर्ग सूबेदार ने कहा कि विधायक जी हम सभी के लिए भगवान के समान थे. आज पूरा असहाय और गरीब तबका इस नेता के लिए तरस रहा है. अब ऐसे विधायक जल्द देखने को नहीं मिलेंगे. मुन्ना राजभर ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन विधायक थे; एक राजा दिल इंसान आज हमारे बीच से चला गया, जिनके जैसा व्यक्तित्व अब शायद ही कभी देखने को मिले.



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