पानी की किल्लत से लोगों के रिश्ते हो रहे हैं खराब, चित्रकूट में इस बात पर लड़ जाते हैं लोग

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पानी की किल्लत से लोगों के रिश्ते हो रहे हैं खराब, चित्रकूट में इस बात पर लड़ जाते हैं लोग


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पाठा क्षेत्र के इटवा, रामपुर, छोटी पाटिन और दराई जैसे गांवों में गर्मी का मतलब है दिनभर पानी की तलाश में जद्दोजहद,जब आज लोकल 18 की टीम दराई गांव पहुंची तो सुबह के 6 बजे ही महिलाएं बाल्टी और बर्तन लेकर हैंडपंप क…और पढ़ें

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चित्रकूट: बुंदेलखंड का पाठा इलाका आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है. उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के पाठा क्षेत्र के कई गांव आज भी 90 के दशक जैसी हालातों में जी रहे हैं. जैसे ही सूरज की तपिश बढ़ती है इन इलाकों में पानी की किल्लत मचने लगती है. गांव के लोगों को पीने तक के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता है. ये चिंता की बात इसलिए भी है यहां के लोगों को सालों से इस समस्या का समाना करना पड़ता है.

सुबह से पानी के लिए लग जाती है लाइन
बता दें कि पाठा क्षेत्र के इटवा, रामपुर, छोटी पाटिन और दराई जैसे गांवों के लोगों के लिए गर्मी का मतलब दिनभर पानी की तलाश में जद्दोजहद करना है. जब आज लोकल 18 की टीम दराई गांव पहुंची तो सुबह 6 बजे ही महिलाएं बाल्टी और बर्तन लेकर हैंडपंप के पास लाइन में खड़ी थी. गांव की महिलाओं ने बातचीत में बताया कि सुबह से लाइन में लगे रहते हैं और दोपहर में जाकर कहीं नंबर आता है पानी का. इतना ही नहीं कई बार तो घंटों धूप में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है. महिलाओं का कहना है कि उनका सारा दिन पानी भरने में ही निकल जाता है.

पानी के टैंकर बन रहे हैं आपसी झगड़े का कारण
जानकारी के लिए बता दें कि पेयजल आपूर्ति के लिए सरकारी टैंकर गांव-गांव भेजे जा रहे हैं, लेकिन वो राहत कम और परेशानी ज्यादा बनते दिख रहे हैं. दराई गांव की ही महिलाओं ने आगे की जानकारी में बताया कि टैंकर आता है तो भीड़ ऐसे टूट पड़ती है जैसे राशन बंट रहा हो. उन्होंने बताया कि कई बार धक्का-मुक्की में पानी भरने के लिए झगड़े तक हो जाते हैं. इससे लोगों के आपसी व्यवहार पर भी असर पड़ता है और उनमें विवाद होता है.

हर घर नल योजना का कुछ पता नहीं
गांव के लोगों ने बताया कि करीब 1-2 साल पहले उनके घरों के सामने नल तो लगवा दिए गए थे लेकिन, उनमें आज तक एक बूंद पानी नहीं आया है. ग्रामीणों का कहना है कि बगल के गांवों में योजना चालू हो गई है लेकिन हमारे गांव में न तो पाइपलाइन से कनेक्शन हुआ और न ही आज तक नल का एक बूंद पानी मिला. हालांकि, अब देखना होगा कि पाठा क्षेत्र में यह योजना कितने महीनों में गांव में पानी की समस्या को दूर कर पाएगी.

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पानी के संकट से लोगों रिश्ते हो रहे हैं खराब, चित्रकूट में है ये हाल



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