यूपी की अनोखी रियासत, खुशी में यहां तोपों से दी जाती थी सलामी
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Rampur Nawabi Heritage: रामपुर के नवाब हामिद अली खान को शुतुरमुर्ग पालने का शौक था, जिसके लिए शुतरखाना बनाया गया. हाथीखाना में नवाबों की सेना के हाथी रखे जाते थे. ये मोहल्ले नवाबी विरासत की गवाही देते हैं.
रामपुर: रामपुर का तोपखाना रियासत की असल पहचान रहा है. यहां जब भी रियासत में कोई खुशी होती थी तो किले से तोपों की सलामी दी जाती थी. यह परंपरा इतनी मजबूत थी कि महात्मा गांधी के निधन पर भी यहां से तोप चलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई थी.

रामपुर के नवाब हामिद अली खान को दुनिया के सबसे तेज़ दौड़ने वाले पक्षी शुतुरमुर्ग पालने का बेहद शौक था. इनके पालन के लिए शहर के बीचों-बीच एक खास जगह बनाई गई, जिसे शुतरखाना कहा जाने लगा. यहां हर शुतुरमुर्ग के लिए अलग से कमरे के रखवाले और देखभाल का पूरा इंतज़ाम था. आज भी यह मोहल्ला नवाबों के शौक और भव्यता की गवाही देता है.

रामपुर के इस मोहल्ले यानी हाथीखाना में नवाबों की सेना के हाथी रखे जाते थे, बाद में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को यहीं बसाया गया. आज भी यह मोहल्ला अपने ऐतिहासिक नाम से पहचाना जाता है.

अस्तबल खाना, नवाबों के घोड़ों के लिए बनाया गया था. नवाब हामिद अली खान और रजा अली खान के दौर में बना यह गेट आज भी रामपुर की नवाबी विरासत का प्रतीक बना हुआ है.

रामपुर के शाही मोहल्लों के नाम बदलने की कोशिशें हुईं, लेकिन लोग आज भी उन्हें उन्हीं ऐतिहासिक नामों से पुकारते हैं. ये नाम नवाबों की यादों को अब भी जिंदा रखते हैं.