Jaunpur News : विलाप करती मां की ममता और बादशाह अकबर का आदेश, ऐसे बना जौनपुर का शाही पुल
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jaunpur news in hindi : इस पुल की नींव 1564 में पड़ी और इसे पूरी तरह बनने में कई साल लगे. रोज हजारों लोग इससे गुजरते हैं, बिना यह जाने कि इसकी नींव एक मां की ममता और सम्राट की करुणा पर रखी गई थी.
जौनपुर. उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित शाही पुल का नाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों में प्रमुखता से लिया जाता है. यह पुल केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि एक संवेदना और करुणा की मिसाल भी है. इतिहासकार डॉ. सईद बताते हैं कि यह पुल मुगल सम्राट अकबर के समय बनवाया गया था, लेकिन इसके निर्माण की कहानी में एक मानवीय पहलू जुड़ा है, जो इसे दूसरे स्थापत्य संरचनाओं से अलग करता है. माना जाता है कि जब सम्राट अकबर जौनपुर आए, तो एक दिन वे गोमती नदी के किनारे टहल रहे थे. टहलते हुए उनकी नजर एक महिला पर पड़ी, जो जोर-जोर से रो रही थी. बादशाह ने पास जाकर कारण पूछा. महिला ने बताया कि वह नदी पार करना चाहती थी, लेकिन उसकी नाव उसे पीछे छोड़कर चली गई और उसका छोटा बेटा उस पार घर पर है. मां अपने बेटे के लिए विलाप कर रही थी.
इस मार्मिक दृश्य ने बादशाह अकबर को भीतर तक झकझोर दिया. महिला की आंखों के आंसुओं और ममता ने अकबर को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तत्काल आदेश दिया कि यहां एक ऐसा मजबूत पुल बनाया जाए, जिससे किसी को नदी पार करने में कठिनाई न हो और किसी मां को अपने बच्चे से यूं अलग न होना पड़े. डॉ. सईद के अनुसार, अकबर के इस आदेश पर तत्काल काम शुरू हुआ और जौनपुर के इस ऐतिहासिक शाही पुल की नींव पड़ी. इस पुल का निर्माण 1564 में किया गया था और इसे पूरी तरह बनने में कई साल लगे. पुल की बनावट में मुगल स्थापत्य कला की छाप है— मेहराबदार संरचना, बलुआ पत्थर की मजबूती और कलात्मक सजावट इसे खास बनाते हैं.
शाही पुल आज भी जौनपुर की पहचान है. प्रतिदिन हजारों लोग इससे गुजरते हैं, बिना यह जाने कि इसके निर्माण की नींव एक मां की ममता और सम्राट की करुणा पर रखी गई थी. समय बीत गया, लेकिन शाही पुल आज भी गोमती नदी पर अकबर की संवेदनशीलता और न्यायप्रियता की कहानी कहता है. यह पुल हमें याद दिलाता है कि इतिहास केवल युद्धों और जीतों से नहीं बनता, बल्कि कभी-कभी एक मां के आंसू भी इतिहास रच देते हैं.